दतिया विधानसभा उपचुनाव का चुनावी मुकाबला अपने सबसे दिलचस्प मोड़ पर पहुँच चुका है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से ठीक पहले आज शाम प्रचार का शोर पूरी तरह थम जाएगा। लेकिन प्रचार रुकने से ठीक पहले दतिया की सियासत में एक ऐसा मोड़ आया है, जिसने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के गणित को उलझा कर रख दिया है। इस बार दतिया के रण में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह को 'साइकिल' का भी साथ मिल गया है। समाजवादी पार्टी ने यहाँ अपना कोई उम्मीदवार न उतारते हुए कांग्रेस को बिना शर्त पूर्ण समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया है।
जीतू पटवारी से फोन में चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, यह फैसला सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सीधे निर्देश पर लिया गया है। दतिया का इलाका उत्तर प्रदेश की सीमा से सटा हुआ है, जहाँ सपा का अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है। समर्थन के तुरंत बाद अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से फोन पर लंबी चर्चा की और उपचुनाव में हर संभव रणनीतिक मदद का भरोसा दिया।मतदाताओं की संख्या अच्छी
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने इस बार अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। दतिया में दलित (SC), आदिवासी (ST) और पिछड़ा वर्ग (OBC) मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है। बसपा के मैदान में न होने और सपा का सीधा समर्थन कांग्रेस को मिलने से यह माना जा रहा है कि यह पारंपरिक वोट बैंक अब सीधे तौर पर कांग्रेस के पाले में खिसक सकता है।
एकजुटता का संदेश
"अखिलेश यादव का यह कदम मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन और विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक बड़ा संदेश है। सपा के साथ आने से जमीनी स्तर पर लड़ाई और मजबूत हुई है।" — जीतू पटवारी, अध्यक्ष, मध्य प्रदेश कांग्रेस
कौन होगा कामयाब अपनी सीट बचाने में
कागजों पर मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के आशुतोष तिवारी और कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच ही दिख रहा है। लेकिन आजाद समाज पार्टी के उम्मीदवार दामोदर यादव की मौजूदगी ने चुनाव को पूरी तरह एकतरफा होने से रोक दिया है। अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव का यह मास्टरस्ट्रोक कांग्रेस के घनश्याम सिंह को विधानसभा पहुँचा पाता है या भाजपा का मजबूत कैडर अपनी सीट बचाने में कामयाब रहता है।
चुनावी टाइमलाइन पर एक नज़र
प्रचार की समाप्ति: आज शाम
मतदान की तारीख: 30 जुलाई
नतीजों का दिन: 3 अगस्त