Delhi High Court: 15 याचिकाएं कीं खारिज, BJP, कांग्रेस और AAP नेताओं पर FIR की मांग ठुकराई
Delhi High Court ने 2020 दिल्ली दंगे और 2019 जामिया हिंसा से जुड़े 15 याचिकाएं खारिज कर दीं। याचिकाओं में कई राजनीतिक नेताओं के खिलाफ FIR, SIT और NIA जांच की मांग की गई थी।
Delhi High Court: वर्ष 2020 में राजधानी दिल्ली में हुए भीषण दंगों और 2019 की जामिया मिलिया इस्लामिया हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में अलग-अलग राजनीतिक दलों के दिग्गजों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली 15 याचिकाओं को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस मनोज जैन की पीठ ने याचिकाओं की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने इन मामलों को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया था—पहला, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगे और दूसरा, दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया परिसर के आसपास हुई हिंसा।
इन प्रमुख नेताओं के खिलाफ दर्ज कराने की थी कोशिश
अदालत में दायर अलग-अलग याचिकाओं में भारतीय राजनीति के कई बड़े चेहरों को निशाना बनाया गया था:
भारतीय जनता पार्टी (BJP): बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और अभय वर्मा के खिलाफ कथित नफरती बयानों को लेकर कानूनी कार्रवाई और एफआईआर की मांग की गई थी।
कांग्रेस (INC): एक अन्य याचिका में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के भाषणों की जांच की मांग उठाई गई थी।
अन्य दल: इनके अलावा आम आदमी पार्टी (AAP) और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के भी कई नेताओं पर मामला दर्ज करने का आवेदन दिया गया था।
SIT और NIA जांच की मांग भी रद्दी की टोकरी में
मामले की गंभीरता को देखते हुए कुछ याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (SIT) से कराने का आग्रह किया था। वहीं एक याचिका में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने इन सभी मांगों को खारिज करते हुए याचिकाओं का निपटारा कर दिया।दंगों में गई थी 53 की जान
उल्लेखनीय है कि 24 फरवरी 2020 को CAA के विरोध के दौरान उत्तर-पूर्वी
दिल्ली में अचानक हिंसा भड़क उठी थी। इस दंगे में 53 बेकसूर लोगों की मौत हो गई थी, जबकि लगभग 700 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इससे पहले, दिसंबर 2019 में जामिया यूनिवर्सिटी के पास भी सीएए विरोधी प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसके बाद से यह पूरा मामला कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया था।