देवशयनी एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं। इस अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिष विशेषज्ञ पिनाकी मिश्रा के अनुसार, व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना जरूरी माना गया है।
देवशयनी एकादशी पर क्या करना चाहिए ?
सूर्योदय से पहले स्नान कर लें व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को शुभ माना गया है। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
इस दिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र, पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत और नैवेद्य अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि तुलसी दल के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
विष्णु मंत्र का जाप करें
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। खासतौर पर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करने से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है।
सात्विक भोजन का सेवन करें
जो लोग निर्जला या निराहार व्रत नहीं रख सकते, वे अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन त्याग नहीं, बल्कि मन और इंद्रियों पर नियंत्रण रखना भी माना जाता है।
दान और सेवा करें
एकादशी के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लोगों की सहायता और सेवा करने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
देवशयनी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए ?
तामसिक भोजन से बचें
एकादशी के दिन मांस, मदिरा और अन्य तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनानी चाहिए।
चावल और अनाज का सेवन न करें
एकादशी व्रत में चावल और अन्य धान्य का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रत रखने वालों को इस नियम का पालन करना चाहिए।
क्रोध और झूठ से बचें
एकादशी केवल भोजन का नहीं, बल्कि विचारों की शुद्धि का भी पर्व माना जाता है। इसलिए इस दिन क्रोध करने, कटु शब्द बोलने और असत्य बोलने से बचना चाहिए।
किसी का अपमान न करें
इस पवित्र दिन पर किसी व्यक्ति का अपमान या किसी जीव को नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। दया और संयम का पालन करना शुभ माना जाता है।
द्वादशी तिथि पर करें व्रत
का पारण देवशयनी एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि पर पारण के साथ किया जाता है। मान्यता है कि नियमों के अनुसार व्रत खोलने से इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।