पुलिस ने साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे 26 म्यूल बैंक खातों के धारकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि इन बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने और अपनी पहचान छिपाने के लिए किया था। पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि म्यूल बैंक खाते साइबर ठगों के लिए रकम को छिपाने और उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का माध्यम बनते हैं। ऐसे खातों पर लगातार निगरानी रखकर पुलिस अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
खातों की जांच में हुआ खुलासा
एएसपी मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि पुलिस मुख्यालय साइबर सेल के निर्देश पर भिलाई नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत पंजाब नेशनल बैंक के कुछ संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलीं। पुलिस जांच में पाया गया कि इन बैंक खातों में साइबर ठगी से हासिल की गई रकम सीधे जमा की गई थी।
इसके बाद इन खातों से पैसों को दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया और कई बार नकद निकासी भी की गई। इन गतिविधियों के आधार पर इन खातों को लेयर-1 यानी म्यूल अकाउंट की श्रेणी में रखा गया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 से 2026 के बीच इन खातों के माध्यम से लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। बैंकिंग रिकॉर्ड, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आगे की कार्रवाई शुरू की।
उपलब्ध कराई बैंकिंग सुविधाएं
प्रारंभिक जांच में पुलिस को पता चला कि गिरफ्तार किए गए कई खाताधारकों ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल खुद नहीं किया, बल्कि उन्हें अन्य लोगों को उपलब्ध करा दिया था। आरोप है कि खाताधारकों ने अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, मोबाइल सिम और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी दूसरे लोगों को दी। साइबर अपराधियों ने इन सुविधाओं का उपयोग ठगी से प्राप्त रकम को छिपाने, अलग-अलग खातों में भेजने और अवैध आर्थिक लाभ कमाने के लिए किया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में अक्सर अपराधी सीधे अपने नाम से बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे आम लोगों को लालच देकर या पैसे का प्रलोभन देकर उनके बैंक खाते किराए पर लेते हैं और फिर उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम का लेन-देन करते हैं।
बैंकिंग दस्तावेज जब्त
पुलिस ने जांच के आधार पर भिलाई नगर थाने में अपराध क्रमांक 388/2026 दर्ज किया है। सभी 26 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 318(3), 318(4) और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एटीएम कार्ड, चेकबुक, पासबुक, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
आरोपियों की तलाश जारी
दुर्ग पुलिस ने बताया कि मामले में जांच अभी जारी है। बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर साइबर ठगी के मुख्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस का मानना है कि गिरफ्तार किए गए म्यूल अकाउंट धारक केवल ठगी की रकम के लेन-देन में शामिल थे, जबकि इसके पीछे बड़े साइबर अपराधियों का नेटवर्क हो सकता है।
पुलिस अब उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधों के लिए किया। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, ओटीपी या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को न दें, क्योंकि इससे वे भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।