राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर अब जांच ने रफ्तार पकड़ ली है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक ने जांच के आदेश दिए हैं। इसी बीच महालेखाकार (ऑडिट) की रिपोर्ट भी सामने आई है, जिसमें खरीद प्रक्रिया और विकास कार्यों में कई गंभीर अनियमितताओं की ओर संकेत किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में कराए गए कई निर्माण और मरम्मत कार्य निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किए गए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई कार्यों में सामग्री का उपयोग तो किया गया, लेकिन उसकी मात्रा का न तो बिलों में स्पष्ट उल्लेख किया गया और न ही उसका कोई अलग रिकॉर्ड उपलब्ध कराया गया। ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि कार्यों का सत्यापन करने के लिए आवश्यक मेजरमेंट बुक (Measurement Book) का संधारण नहीं किया गया। वहीं, खरीद समिति (Purchase Committee) की स्वीकृति से जुड़े दस्तावेज भी जांच टीम के सामने प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
बिना टेंडर कोटेशन पर भुगतान
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वर्ष 2025-26 के दौरान कई खरीदारियां बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए केवल कोटेशन के आधार पर की गईं। ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम, अग्निशमन व्यवस्था, जियो फाइबर और अन्य कार्यों के लिए लाखों रुपए का भुगतान किया गया। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऑक्सीजन पाइपलाइन सिस्टम एवं अन्य संबंधित कार्यों पर 4,24,999 रुपए, ऑक्सीजन पाइपलाइन पर 16,23,581 रुपए तथा अग्निशमन व्यवस्था पर 11,93,900 रुपए खर्च किए गए। इस प्रकार कुल 26,58,280 रुपए का भुगतान बिना टेंडर आमंत्रित किए केवल कोटेशन के आधार पर किया गया।
तकनीकी अधिकारी या उप अभियंता की भागीदारी नहीं
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि खरीद और निर्माण कार्यों की प्रक्रिया में लोक निर्माण विभाग (PWD) के किसी तकनीकी अधिकारी या उप अभियंता की भागीदारी नहीं रही। ऐसे में सभी कार्यों का निष्पादन केवल कोटेशन के आधार पर कराया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
GeM पोर्टल और अनिवार्य अनुमति की भी अनदेखी
ऑडिट में यह भी सामने आया कि खरीदी से पहले सीजीएमएससीएल (CGMSCL) और सीएसआईडीसी (CSIDC) से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त नहीं किए गए। साथ ही सरकारी खरीद के लिए अनिवार्य GeM पोर्टल का भी उपयोग नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि GeM पोर्टल पर एक मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत करीब 8,000 रुपए उपलब्ध थी, जबकि अस्पताल के लिए इससे अधिक दर पर सिलेंडर खरीदे गए। ऑडिट रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया से जुड़ी अन्य कई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है, जिनकी जांच अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही है।विभागीय जांच जारी
स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त संचालक के निर्देश पर मामले की विभागीय जांच जारी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि वित्तीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।