बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच ने सरगुजा जिले के महामाया पहाड़ और डबरीपानी संरक्षित वन क्षेत्र में कथित अवैध कब्जे को लेकर दायर अंतरिम राहत आवेदन को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।
सरगुजा क्षेत्र के महामाया पहाड़ और डबरीपानी रिजर्व फॉरेस्ट इलाके में रशीदा खातून सहित अन्य लोगों पर कई वर्षों से अवैध रूप से मकान बनाकर कब्जा करने के आरोप हैं। राजस्व और वन विभाग की जांच के बाद प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की अंतिम नोटिस जारी की थी, जिसमें एक सप्ताह के भीतर जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से हाई कोर्ट में अर्जेंट हियरिंग के तहत कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई थी। दलील में कहा गया कि उन्हें 17 मार्च 2026 को जारी नोटिस के आधार पर 7 दिनों के भीतर जमीन खाली करने का आदेश दिया गया है। यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रशासन पुलिस बल की मदद से कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल पिछले 15 से 20 वर्षों से उक्त भूमि पर रह रहे हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर द्वारा 25 जनवरी 2025 को पारित आदेश में उनके दस्तावेजों की उचित जांच नहीं की गई और उन्हें वन भूमि पर अधिकार साबित करने में असफल बताया गया।अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय
कोर्ट ने मामले में अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 13 जुलाई निर्धारित की है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया और विभागीय कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
