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गेंदा की खेती से किसान को 2 लाख का मुनाफा
गेंदा की खेती से किसान को 2 लाख का मुनाफा
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सफलता की मिसाल : धान छोड़ गेंदा की खेती से किसान को 2 लाख का मुनाफा

गरियाबंद के छुरा विकासखंड के ग्राम कसेकेरा निवासी किसान हेमचंद साहू ने पारंपरिक धान की खेती छोड़ आधुनिक तकनीकों के साथ गेंदा फूल की खेती अपनाकर सफलता हासिल की है। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के उपयोग से उन्हें करीब 2 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और अन्य किसान भी इस मॉडल से प्रेरित हो रहे हैं।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Aug 2026, 04:40 PM · अपडेट: 09 Sep 2026, 07:51 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के ग्राम कसेकेरा निवासी किसान हेमचंद साहू ने पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़ते हुए आधुनिक बागवानी को अपनाकर नई पहचान बनाई है। राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत उद्यानिकी विभाग के सहयोग से उन्होंने 0.48 हेक्टेयर भूमि में ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के साथ गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती शुरू की। इस बदलाव ने न केवल उनकी खेती को नई दिशा दी, बल्कि उनकी आमदनी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की।

वैज्ञानिक खेती से बढ़ा उत्पादन और मुनाफा

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में हेमचंद साहू ने आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके से फूलों की खेती करना सीखा। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों के उपयोग से उत्पादन बढ़ा, खेती की लागत नियंत्रित रही और फूलों की गुणवत्ता भी बेहतर हुई। तैयार फसल की बिक्री स्थानीय बाजारों के साथ-साथ रायपुर में भी हुई, जिससे उन्हें करीब दो लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। 

फूलों की खेती से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति

हेमचंद साहू का कहना है कि पहले केवल धान की खेती से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल होता था। लेकिन गेंदा फूल की खेती शुरू करने के बाद उनकी आय में बड़ा बदलाव आया है। अब परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है और खेती उनके लिए अधिक लाभदायक व्यवसाय साबित हो रही है।

अन्य किसानों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

हेमचंद साहू की सफलता ने आसपास के किसानों का भी ध्यान आकर्षित किया है। उनके बेहतर परिणामों को देखकर क्षेत्र के कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ गेंदा फूल की व्यावसायिक खेती अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। इससे क्षेत्र में आधुनिक बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आधुनिक तकनीक से बढ़ रही किसानों की आय

उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कम भूमि में अधिक लाभ देने वाली फूलों की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है। ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों से पानी की बचत के साथ उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार होता है। हेमचंद साहू की सफलता इस बात का उदाहरण है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, वैज्ञानिक खेती और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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