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Farmers received information about modern technology. (Image Source: CGDPR)
Farmers received information about modern technology. (Image Source: CGDPR)
राज्य सरकार

Fish Farming: जलाशयों में पिंजरा पालन से रोजगार और उत्पादन बढ़ाने की तैयारी, किसानों को मिला प्रशिक्षण

Fish Farming: छत्तीसगढ़ में केज कल्चर और तालाब मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में आईसीएआर-सीआईएफआरआई के सहयोग से कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें किसानों को मछलियों की बीमारी पहचान, रोकथाम और वैज्ञानिक उपचार की जानकारी दी गई।

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प्रकाशित: 11 Sep 2026, 06:03 PM · अपडेट: 19 Oct 2026, 08:36 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Fish Farming: छत्तीसगढ़ के समृद्ध जल संसाधनों और जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा पालन) के माध्यम से मछली उत्पादन की विशाल संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। मत्स्य पालन विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा आईसीएआर-सीआईएफआरआई बैरकपुर (कोलकाता) के सहयोग से रायपुर स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में दो दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य तालाबों और केज कल्चर में मछली पालन कर रहे किसानों को मछलियों में होने वाली बीमारियों की त्वरित पहचान (रियल-टाइम डायग्नोस्टिक्स) और उनके प्रभावी बचाव व इलाज के आधुनिक तरीकों से अवगत कराना था।

वैज्ञानिकों द्वारा दी गई तकनीकी मार्गदर्शन

कार्यशाला में आईसीएआर-सीआईएफआरआई के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. असित कुमार बेरा तथा सोहिनी चटर्जी ने विस्तृत व्याख्यान दिए। उन्होंने किसानों को केज कल्चर और तालाबों में होने वाली बीमारियों के लक्षण, रोकथाम तथा उनके वैज्ञानिक उपचार की बारीकियों से अवगत कराया। इस दो दिवसीय आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 50-60 केज कल्चर किसान और 50-60 पारंपरिक (तालाब) मत्स्य पालक शामिल हुए। इसके साथ ही विभिन्न जिलों के मत्स्य अधिकारियों ने भी कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी निभाई।

भविष्य की रणनीतियों पर मंथन

कार्यशाला में चर्चा के दौरान राज्य में मत्स्य पालन के बेहतर प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं की पहचान की गई। फील्ड लेवल जांच, खेत और जलस्रोतों के स्तर पर ही बीमारियों की त्वरित पहचान करने की दिशा में भी चर्चा की गई। प्रशिक्षण एवं डेटाबेस मैदानी कर्मचारियों को रोग रिपोर्टिंग का प्रशिक्षण देना तथा भविष्य के प्रबंधन हेतु जलाशयों व मछलियों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डेटाबेस तैयार करने की जानकारी दी गई। 

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने राज्य में मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए इस प्रकार के एकीकृत प्रबंधन को बेहद जरूरी बताया। कार्यक्रम में एन.एस. नाग संचालक, मत्स्य पालन छत्तीसगढ़, आनंद निषाद अध्यक्ष, मछुआ कल्याण बोर्ड, डॉ. लखन लाल धीवर उपाध्यक्ष, मछुआ कल्याण बोर्ड, बीना गड़पाले (उप-संचालक, मत्स्य पालन प्रशिक्षण संस्थान), तथा विकास कुमार साहू सहायक मत्स्य अधिकारी, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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