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Sudarshan Baghel becomes a successful fish farmer(Image Source: CGDPR)
Sudarshan Baghel becomes a successful fish farmer(Image Source: CGDPR)
राज्य सरकार

fish farming: छोटी डबरी से शुरू हुआ सफर, आधुनिक मछली पालन से सुदर्शन ने रची सफलता की कहानी

fish farming: बस्तर जिले के दरभा विकासखंड के किसान सुदर्शन बघेल ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए आधुनिक मछली पालन को अपनाया। वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन से उन्होंने उत्पादन बढ़ाया और सीधे बाजार में बिक्री कर अच्छी आय अर्जित की।

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प्रकाशित: 18 Sep 2026, 12:35 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 01:04 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
fish farming: दृढ़ संकल्प, मेहनत और शासकीय योजनाओं के प्रभावी लाभ से आजीविका को नई दिशा देने का प्रेरक उदाहरण बस्तर जिले के दरभा विकासखंड के ग्राम रामपाल छिंदावाड़ा निवासी कृषक सुदर्शन बघेल ने प्रस्तुत किया है। कभी सीमित संसाधनों के साथ पारंपरिक खेती और छोटी डबरी में मछली पालन करने वाले सुदर्शन आज आधुनिक मछली पालन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
सुदर्शन बघेल पहले मुख्य रूप से पारंपरिक खेती-बाड़ी पर निर्भर थे। अतिरिक्त आय के लिए वे छोटी धान मिल भी संचालित करते थे और एक छोटी डबरी में सीमित स्तर पर पारंपरिक तरीके से मछली पालन करते थे। सीमित संसाधनों और पारंपरिक कार्यप्रणाली के कारण उनकी आय भी सीमित थी। व्यवसाय का विस्तार करना उनके लिए लगातार चुनौती बना हुआ था।

शासकीय योजना ने दिया आगे बढ़ने का अवसर

आय बढ़ाने के प्रयासों के दौरान सुदर्शन को मत्स्य विभाग की योजनाओं की जानकारी मिली। उन्होंने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेने का निर्णय लिया। योजना के अंतर्गत उन्होंने सवा एकड़ क्षेत्र में तालाब निर्माण एवं इनपुट सहायता घटक का लाभ लिया। अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतर्गत उन्हें साढ़े पांच लाख रुपए की स्वीकृत लागत पर 60 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ। आर्थिक सहायता के साथ विभाग से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके लिए आधुनिक एवं व्यवस्थित मछली पालन की राह आसान की।

वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ा उत्पादन

योजना का लाभ मिलने के बाद सुदर्शन ने तालाब में वैज्ञानिक तरीके से मिश्रित प्रजातियों की मछलियों का पालन शुरू किया। बेहतर प्रबंधन और निरंतर मेहनत के परिणामस्वरूप उन्हें अच्छी गुणवत्ता, बड़े आकार और बेहतर वजन वाली मछलियों का उत्पादन प्राप्त हुआ। सुदर्शन ने उत्पादन के विपणन में भी व्यावसायिक समझ का परिचय दिया। उन्होंने मछलियों को बिचौलियों के माध्यम से बेचने के बजाय अपने गांव और आसपास के बाजारों में सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया। प्रत्यक्ष बिक्री से उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हुआ और उन्होंने डेढ़ लाख रुपये की प्रत्यक्ष विक्रय आय अर्जित की।
आज सुदर्शन बघेल के लिए मछली पालन केवल अतिरिक्त आय का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली आर्थिक सहायता, विभागीय मार्गदर्शन, वैज्ञानिक प्रबंधन और उनकी मेहनत ने सीमित संसाधनों वाले किसान को आधुनिक मत्स्य उद्यम की दिशा में आगे बढ़ाया है।
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