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Illegal felling of eucalyptus trees (Image Source: AI Generated)
Illegal felling of eucalyptus trees (Image Source: AI Generated)
बस्तर संभाग

 Forest Department: 15 साल पुराने 50 नीलगिरी पेड़ काटने का आरोप, FIR की मांग

Forest Department: केशकाल के बड़े राजपुर वन परिक्षेत्र के बांसकोट में सरकारी जमीन पर लगे 45 से 50 नीलगिरी पेड़ों की अवैध कटाई और बिक्री का आरोप लगा है। पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने करीब 3 लाख रुपये में लकड़ी बेचे जाने का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ FIR की मांग की है।

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प्रकाशित: 02 Nov 2026, 04:11 PM · 4 मिनट पढ़ने का समय
केशकाल
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
 Forest Department: वन मंडल केशकाल के बड़े राजपुर (विश्रामपुरी) वन परिक्षेत्र अंतर्गत बांसकोट के बीट क्रमांक 1332 में सरकारी जमीन पर लगे नीलगिरी के पेड़ों की कथित अवैध कटाई और बिक्री का मामला सामने आया है। करीब 45 से 50 विकसित पेड़ों को काटे जाने के आरोप के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है। केशकाल के पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

15 साल पहले लगाए गए थे नीलगिरी के पौधे 

पूर्व विधायक कृष्ण कुमार ध्रुव के अनुसार, ग्राम राहटीपारा, ग्राम पंचायत बोलेगा के अंतर्गत आने वाले बीट क्रमांक 1332 में वन विभाग की ओर से लगभग 15 वर्ष पहले नीलगिरी के पौधे लगाए गए थे। समय के साथ ये पौधे विकसित होकर बड़े पेड़ बन गए थे। आरोप है कि इनमें से करीब 45 से 50 परिपक्व पेड़ों को काट दिया गया। बताया जा रहा है कि काटे गए पेड़ों की गोलाई लगभग 60 से 70 सेंटीमीटर थी। ध्रुव का आरोप है कि पेड़ों की कटाई के बाद उनकी लकड़ी को बिना वैधानिक विभागीय प्रक्रिया और नीलामी के ओडिशा के एक व्यापारी को करीब तीन लाख रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने लकड़ी की कटाई और दूसरे राज्य तक उसके परिवहन को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

वन विभाग के स्थानीय अमले की भूमिका पर उठाए सवाल

इस मामले में पूर्व विधायक ने स्थानीय वन अमले की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वन संपदा की सुरक्षा की जिम्मेदारी वन विभाग की होती है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि पेड़ों की कटाई किसकी अनुमति या आदेश से हुई और लकड़ी को बाहर ले जाने के लिए किन प्रक्रियाओं का पालन किया गया। उन्होंने कहा कि यदि इस पूरे मामले में किसी वनकर्मी की लापरवाही, मिलीभगत या संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पूर्व विधायक ने रखीं तीन प्रमुख मांगें

कृष्ण कुमार ध्रुव ने शासन और प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं
  • मौके का निरीक्षण और पंचनामा: वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचकर कटे हुए पेड़ों की संख्या, उनकी स्थिति और लकड़ी के परिवहन से जुड़े तथ्यों की जांच करें। साथ ही विधिवत पंचनामा तैयार किया जाए। 
  • दोषियों के खिलाफ FIR: जांच में अवैध कटाई और लकड़ी की बिक्री या परिवहन में शामिल पाए जाने वाले व्यक्तियों, बिचौलियों और संबंधित व्यापारी के खिलाफ वन अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। 
  • जिम्मेदार वनकर्मियों पर कार्रवाई: यदि जांच में बीट गार्ड या अन्य वनकर्मियों की लापरवाही अथवा संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ निलंबन सहित नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी तस्वीर

पूर्व विधायक ने जिला प्रशासन और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर मौजूद वन संपदा सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी सुरक्षा करना विभाग की जिम्मेदारी है। फिलहाल इस मामले में पूर्व विधायक की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और वन विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही पेड़ों की कटाई, लकड़ी की बिक्री और परिवहन से जुड़े पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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