बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी अभयानंद ने भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस पूरी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि मौके पर अनुमंडल पदाधिकारी यानी एसडीएम क्या कर रहे थे।
अभयानंद बिहार का एक जाना-माना नाम हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के दौरान राज्य की कानून व्यवस्था को सुधारने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। उनके काम की आज भी काफी तारीफ की जाती है। इसी वजह से इस एनकाउंटर को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद राज्य में सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
भीड़ और अपराध के मामलों में अंतर समझाया
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने पुलिस की कार्रवाई के तौर-तरीकों को आम भाषा में समझाते हुए कहा कि पुलिस दो अलग स्थितियों में काम करती है। पहली स्थिति तब होती है जब कहीं बहुत बड़ी भीड़ इकट्ठा हो या कानून व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती हो। ऐसी जगहों पर पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट यानी सरकारी अधिकारी को तैनात किया जाता है। लेकिन भरत तिवारी का मामला बिल्कुल अलग था। यहाँ पुलिस किसी भीड़ को संभालने नहीं, बल्कि एक अकेले अपराधी को पकड़ने गई थी। यह सीधे तौर पर अपराध से जुड़ा मामला था और ऐसे ऑपरेशन में एसडीएम का मौके पर मौजूद रहने का कोई सीधा संबंध नहीं होता है। इस बात ने उनके मन में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुठभेड़ के दौरान हुई थी आरोपी की मौत
यह पूरा मामला सत्रह जून का है, जब पुलिस टीम बिलौटी गांव में छापेमारी करने पहुंची थी। पुलिस के मुताबिक, वहां उनके और भरत तिवारी के बीच आमने-सामने की मुठभेड़ हो गई थी। पुलिस का दावा है कि उनकी तरफ से पांच राउंड और आरोपी की तरफ से दस से पंद्रह राउंड गोलियां चलाई गई थीं। इस गोलीबारी में पुलिस का कोई भी जवान घायल नहीं हुआ था। मुठभेड़ में गंभीर रूप से घायल होने के बाद भरत तिवारी को इलाज के लिए पटना के पीएमसीएच अस्पताल भेजा गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद मजिस्ट्रेट की देखरेख में शव का पोस्टमार्टम कराया गया था।पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से सामने आई बातें
अब इस मामले की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है, जो शरीर की जांच के बाद तैयार की जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को शरीर के निचले हिस्सों में गोलियां लगी थीं। इसमें तीसरी गोली दाईं जांघ के भीतरी हिस्से में, चौथी गोली जांघ के बाहरी हिस्से में और पांचवीं गोली बाएं पैर में पीछे की तरफ लगी थी। जांच में पता चला है कि चार गोलियां शरीर के आर-पार निकल गई थीं, जबकि एक गोली शरीर के अंदर ही फंसी रह गई थी। पुलिस ने उस बुलेट को जांच के लिए अपने पास सुरक्षित रख लिया है। पूर्व डीजीपी के इन बयानों के बाद अब इस पूरे एनकाउंटर की प्रक्रिया पर बहस छिड़ गई है।