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Gariaband snake procession at Rishi Panchami (Image Source: Keertiman Media)
Gariaband snake procession at Rishi Panchami (Image Source: Keertiman Media)
रायपुर

Gariaband News: अनोखी परंपरा, ऋषि पंचमी पर निकली सर्पों की शोभायात्रा, देखने उमड़ी भारी भीड़

Gariaband News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी के अवसर पर एक अनोखी धार्मिक परंपरा देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों के बीच जब दर्जनों सांप शोभायात्रा का हिस्सा बने तो हर किसी की नजरें इस आयोजन पर टिक गईं।

कीर्तिमान डेस्क | रोशनी पटेल
15 Sep 2026, 06:38 PM
गरियाबंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Gariaband News: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी के अवसर पर एक अनोखी धार्मिक परंपरा देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और बड़ी संख्या में मौजूद ग्रामीणों के बीच जब दर्जनों सांप शोभायात्रा का हिस्सा बने तो हर किसी की नजरें इस आयोजन पर टिक गईं।
सांवरा समाज के लोगों ने विधि-विधान से सर्पों की पूजा-अर्चना की और इसके बाद पूरे गांव में उनकी भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों और दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

वर्षों पुरानी है सर्प पूजा की परंपरा

गरियाबंद जिले के राजिम क्षेत्र स्थित ग्राम देवरी में ऋषि पंचमी के दिन सर्प पूजा और शोभायात्रा निकालने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। सांवरा समाज के लोग इस दिन विशेष धार्मिक अनुष्ठान करते हैं और सर्पों को श्रद्धा के साथ पूजते हैं। पूजा के बाद ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच गांव में शोभायात्रा निकाली जाती है। इस दौरान पूरा गांव धार्मिक माहौल में डूब जाता है और लोग इस अनोखी परंपरा के साक्षी बनते हैं। 

सर्प पूजा के साथ दी जाती है बचाव और उपचार की जानकारी

इस आयोजन की खास बात यह है कि यहां केवल धार्मिक मान्यता के तहत सर्प पूजा नहीं की जाती, बल्कि लोगों को सर्पदंश से बचाव और उपचार के बारे में भी जागरूक किया जाता है। गांव में संचालित गुरु सांवरा पाठशाला में सालभर सर्पदंश उपचार से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। ऋषि पंचमी के अवसर पर इसी प्रशिक्षण को पूरा करने वाले लोगों का दीक्षांत समारोह भी आयोजित किया जाता है।

पूजा के बाद सर्पों को वापस जंगल में छोड़ा जाता है

परंपरा के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठान और पूजा संपन्न होने के बाद सर्पों को सुरक्षित तरीके से वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है। इसका उद्देश्य उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में लौटाना और वन्यजीवों के संरक्षण की भावना को बढ़ावा देना है। ग्राम देवरी की यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देती है।
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