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Gotmar Mela stone pelting crowd in Pandhurna (Image Source: Social Media)
Gotmar Mela stone pelting crowd in Pandhurna (Image Source: Social Media)
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Gotmar Mela: पत्थरबाजी में 118 लोग घायल, 70 साल में 14 लोगों की जा चुकी है जान

Gotmar Mela: पांढुर्णा में आयोजित गोटमार मेले में झंडे पर कब्जे को लेकर हुई पत्थरबाजी में 118 लोग घायल हो गए। 70 साल पुरानी इस परंपरा में अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है।

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प्रकाशित: 11 Sep 2026, 06:10 PM · अपडेट: 17 Oct 2026, 08:55 PM
मध्यप्रदेश
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Gotmar Mela: पांढुर्णा में आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में इस बार भी परंपरा के नाम पर जमकर पत्थरबाजी हुई। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव के लोगों के बीच हुए मुकाबले ने हिंसक रूप ले लिया। दोनों पक्षों की ओर से बरसाए गए पत्थरों में 118 लोग घायल हो गए। पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जबकि एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूट गई। 
घायलों को इलाज के लिए अस्पताल और मौके पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों में भर्ती कराया गया। अचानक हुई पत्थरों की बौछार के बीच कई लोगों को जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। 

गोटमार मेले की परंपरा और खूनी इतिहास

झंडे पर कब्जे को लेकर होता है मुकाबला गोटमार मेले की परंपरा के अनुसार जाम नदी के बीच एक झंडा लगाया जाता है। इस झंडे को हासिल करने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने आते हैं और पत्थर फेंककर मुकाबला करते हैं। वर्षों पुरानी यह परंपरा हर साल बड़ी संख्या में लोगों को घायल करती रही है। 
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के तमाम इंतजाम किए जाने के बावजूद इस आयोजन में पत्थरबाजी को रोकना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। 70 साल में 14 लोगों की मौत, हजारों घायल पोला पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले इस मेले की शुरुआत मां चंडिका के पूजन और दर्शन के साथ होती है। 

70 साल में 14 मौतें, सुरक्षा में 700 जवान तैनात

वर्ष 1955 से अब तक गोटमार मेले में पत्थरबाजी के दौरान 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों लोग घायल हुए हैं। कई लोग गंभीर चोटों के कारण दिव्यांग तक हो चुके हैं। प्रशासन ने कई बार इस परंपरा को सुरक्षित बनाने के लिए रबर बॉल से आयोजन कराने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय लोगों की भावनाओं और परंपरा के दबाव के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सके। 700 जवान, ड्रोन और CCTV से निगरानी इस बार मेले को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। 

ड्रोन-CCTV से निगरानी, प्रेम कहानी से जुड़ी मान्यता

कलेक्टर और एसपी की मौजूदगी में करीब 700 पुलिस जवानों को तैनात किया गया था। पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी से की जा रही थी। स्वास्थ्य विभाग को भी अलर्ट मोड पर रखा गया था, ताकि किसी भी आपात स्थिति में घायलों को तुरंत इलाज मिल सके। 
प्रेम कहानी से जुड़ी है गोटमार मेले की मान्यता गोटमार मेले को लेकर कई लोककथाएं प्रचलित हैं। सबसे प्रसिद्ध मान्यता पांढुर्णा के युवक और सावरगांव की युवती की प्रेम कहानी से जुड़ी है। 

प्रेम कहानी से जुड़ी गोटमार मेले की परंपरा

कहा जाता है कि दोनों प्रेमी जब जाम नदी पार कर रहे थे, तब उन्हें रोकने के लिए दोनों गांवों के लोगों ने पत्थर फेंके थे। इसी घटना की याद में गोटमार मेले की शुरुआत मानी जाती है। हालांकि, स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि समय के साथ इस परंपरा में गोफन और शराब के इस्तेमाल से आक्रामकता बढ़ गई है, जिससे यह आयोजन अब सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
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