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Organic farming initiative in Gaurela-Pendra-Marwahi
Organic farming initiative in Gaurela-Pendra-Marwahi
राज्य सरकार

Gourela Organic Farming: गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही में जैविक खेती को बढ़ावा

Gourela Organic Farming: गौरेला में जीवामृत के प्रयोग से 22 दिन की धान फसल में बेहतर वृद्धि और सुगंध देखने को मिली। कीट-बीमारी का प्रकोप नहीं होने से किसानों का जैविक खेती के प्रति रुझान बढ़ा।

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प्रकाशित: 25 Aug 2026, 01:18 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 09:53 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Gourela Organic Farming: राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए निरंतर किसानों को जागरूक कर रही है। कृषि विभाग द्वारा समय-समय पर जैविक खेती के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गौरेला-पेण्ड्रा-मारवाही जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 
जिले की कुल 171 पंचायतों में से अब तक 160 पंचायतों में जीवामृत के उपयोग से मॉडल किसान फार्म तैयार किए गए हैं, जिनका आसपास एवं अन्य गांवों के किसानों को भ्रमण कराकर जैविक खेती के लाभों से अवगत कराया जा रहा है।

गौरेला में जीवामृत का कमाल, 22 दिन में धान की फसल में दिखा असर
जैविक खेती पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित 

गौरेला विकासखंड में जीवामृत के उपयोग एवं जैविक खेती पर व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए किसानों ने भाग लिया। किसानों को जीवामृत, मृदा परीक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार, जैविक खेती तथा उन्नत कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई। किसानों को गौरेला के कृषक बृजलाल राठौर के फार्म का भ्रमण भी कराया गया, जहां म्यूटेंट विष्णुभोग धान की फसल में जीवामृत का उपयोग किया गया है। 

22 दिन की फसल में दिखा जीवामृत का असर

मात्र 22 दिन की फसल में सुगंध आने के साथ ही फसल की बेहतर वृद्धि देखी गई तथा कीट एवं बीमारी का प्रकोप नहीं पाया गया। किसानों ने जीवामृत के उपयोग से प्राप्त सकारात्मक परिणामों को देखकर जैविक खेती अपनाने में विशेष रुचि दिखाई।
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