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Case of sterilization failure at Rajnandgaon Medical College
Case of sterilization failure at Rajnandgaon Medical College
राजनांदगांव

Sterilization Failure: 2 साल पहले हुई नसबंदी फेल, महिला फिर हुई गर्भवती, परिजनों ने लगाया पुलिस की धमकी देने का आरोप

Sterilization Failure: राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज में नसबंदी के दो साल बाद महिला पांच माह की गर्भवती पाई गई। परिवार ने अस्पताल पर गर्भपात, दोबारा नसबंदी का दबाव और धमकी देने का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 25 Aug 2026, 03:08 PM · अपडेट: 04 Oct 2026, 06:46 AM
राजनांदगांव
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Sterilization Failure: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव स्थित पेंड्री के शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (MCH) से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ के गायनिक वार्ड में डॉक्टरों की घोर लापरवाही के चलते दो साल पहले कराई गई नसबंदी फेल हो गई और पीड़ित महिला दोबारा गर्भवती हो गई। 
इसके बाद जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तो डॉक्टरों ने उन पर जबरन गर्भपात कराने के बाद दोबारा नसबंदी कराने का दबाव बनाया और बात न मानने पर पुलिस कार्रवाई की धमकी तक दे डाली। बिजनापुर के रहने वाले सुमन कुमार वर्मा ने बताया कि लगभग दो साल पहले उनकी पत्नी का मेडिकल कॉलेज में सिजेरियन (ऑपरेशन) से प्रसव हुआ था। उस समय डॉक्टरों की सलाह पर परिजनों ने नसबंदी के लिए सहमति पत्र भरा था। प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई। 

5 महीने के गर्भ का कराया एबॉर्शन 

सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन जब महिला को हाल ही में दोबारा गर्भावस्था के लक्षण महसूस हुए, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। जांच कराने पर पता चला कि महिला 5 महीने की गर्भवती है। आनन-फानन में परिजन महिला को इलाज के लिए दोबारा उसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां 5 महीने के गर्भ का एबॉर्शन (गर्भपात) कराया गया। 5 माह के गर्भपात के बाद महिला की शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी थी। 
Keertiman

नसबंदी ना करने पर दी पुलिस की धमकी

परिजनों का कहना है कि वे बिना दोबारा नसबंदी कराए मरीज को घर ले जाना चाहते थे ताकि वह स्वस्थ हो सके। आरोप है कि अस्पताल प्रशासन ने फिर से नसबंदी के फॉर्म पर दस्तखत करने के लिए परिजनों को मजबूर किया। मना करने पर डिस्चार्ज न करने और पुलिस में शिकायत करने की धमकियां दी गईं। अंततः एक स्थानीय समाजसेवी के दखल के बाद ही महिला को अस्पताल से छुट्टी मिल सकी। 

जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग 

इस पूरे विवाद पर जब अस्पताल के डॉक्टर पवन जेठानी से बात की गई, तो उन्होंने कहा, "मैं फिलहाल शहर से बाहर हूँ। महिला के इलाज का पुराना रिकॉर्ड देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। वैसे कई बार नसबंदी फेल होने की गुंजाइश रहती है। फिलहाल परिजनों की सहमति पर महिला की नसबंदी कर दी गई है।" आमतौर पर दो बार सिजेरियन डिलीवरी होने पर डॉक्टर नसबंदी की सलाह देते हैं, लेकिन ऑपरेशन के दो साल बाद महिला का पुनः गर्भवती होना या तो नसबंदी न किए जाने की ओर इशारा करता है या फिर इसमें भारी तकनीकी चूक हुई है। पीड़ित परिवार ने इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की है।
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