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ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द
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NIT रायपुर को हाईकोर्ट से झटका : बिना कारण बताओ नोटिस ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने NIT रायपुर द्वारा निजी सुरक्षा और हाउसकीपिंग एजेंसी को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने का आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ब्लैकलिस्टिंग जैसी गंभीर कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को स्पष्ट शो-कॉज नोटिस और जवाब देने का पूरा अवसर देना जरूरी है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 22 Aug 2026, 01:14 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 10:08 AM
बिलासपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) रायपुर के एक बड़े फैसले को पलटते हुए ठेकेदार के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने एनआईटी रायपुर द्वारा एक निजी सुरक्षा और हाउसकीपिंग एजेंसी को एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट (काली सूची में डालना) करने के आदेश को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि किसी भी संस्था या व्यक्ति को बिना अपनी सफाई पेश करने का मौका दिए ऐसा सख्त कदम उठाना कानूनी रूप से सही नहीं है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनाया। 

सीधा असर भविष्य के कारोबार पर 

बेंच ने 19 दिसंबर 2025 को जारी एनआईटी के ब्लैकलिस्टिंग आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर किसी कंपनी की साख और उसके भविष्य के कारोबार पर पड़ता है। अदालत ने सुनवाई के दौरान एक बेहद गंभीर टिप्पणी की। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी फर्म या ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी 'नागरिक मृत्यु' (Civil Death) के समान है। इससे वह कंपनी भविष्य में किसी भी सरकारी टेंडर में हिस्सा लेने का अधिकार खो देती है, जिससे उसका पूरा बिजनेस ठप हो सकता है। 

मिलना चाहिए जवाब देने का मौका 

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि काम के दौरान कमियों को लेकर दी गई कोई पुरानी चेतावनी या साधारण नोटिस को 'ब्लैकलिस्टिंग का शो-कॉज नोटिस' नहीं माना जा सकता। अगर किसी संस्था को ब्लैकलिस्ट करना है, तो उसे पहले स्पष्ट रूप से यह बताना होगा कि उस पर यह कार्रवाई प्रस्तावित है और उसे जवाब देने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

  • टेंडर और काम: इंदौर की 'कामथेन सिक्योरिटी सर्विस' ने एनआईटी रायपुर का टेंडर हासिल कर फरवरी 2024 में सुरक्षा और हाउसकीपिंग की सेवाएं देना शुरू किया था।

  • विवाद की वजह: कंपनी ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक सेवाएं दीं, लेकिन एनआईटी की ओर से कई महीनों का बिल अटका रहा। नवंबर 2024 में एनआईटी ने जीएसटी और लेबर पेमेंट को लेकर पत्र जारी किया, जिस पर कंपनी ने अपने बकाया बिलों के भुगतान की मांग की।

  • अचानक मिली कार्रवाई की खबर: अनुबंध फरवरी 2025 में खत्म हो गया। कंपनी को 19 दिसंबर 2025 के ब्लैकलिस्टिंग आदेश की भनक आठ महीने बाद तब लगी, जब दतिया जिले में एक नए टेंडर के दौरान प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने इस आदेश के आधार पर आपत्ति दर्ज कराई।

बिना नोटिस कार्रवाई पर कोर्ट की सख्ती 

याचिकाकर्ता कंपनी ने कोर्ट में दलील दी कि एनआईटी ने अनुबंध खत्म होने के बाद बिना कोई कारण बताओ (Show-Cause) नोटिस दिए सीधे ब्लैकलिस्ट करने का फरमान सुना दिया। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को सही मानते हुए एनआईटी के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, अदालत ने एनआईटी को नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की कार्रवाई करने की छूट दी है।
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