निजता और 'पर्सनालिटी राइट्स' का सीधा हनन
अदालत में अनुज शर्मा के वकीलों ने बेहद मजबूत तर्क रखे। उन्होंने कहा:
व्यक्तित्व अधिकार (Personality Rights): किसी भी व्यक्ति की आवाज, नाम, पहचान या तस्वीर का उसकी बिना इजाजत इस्तेमाल करना उसके पर्सनालिटी राइट्स का खुला उल्लंघन है।
संविधान का दायरा: इस तरह का कृत्य संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत हर नागरिक को मिले 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) का भी सीधा हनन करता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और क्रिएटर्स पर कसता शिकंजा
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और यह निर्देश जारी किए:
कंटेंट पर तुरंत बैन: अनुज शर्मा और उनके परिवार के खिलाफ पोस्ट किए गए सभी फर्जी वीडियो, अश्लील कंटेंट, मार्फ्ड तस्वीरें और आपत्तिजनक कैरिकेचर को तुरंत हटाकर ब्लॉक किया जाए।
नोटिस जारी: फर्जी अकाउंट चलाने वाले एडमिन्स, चैनल संचालकों और संबंधित कंटेंट क्रिएटर्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
गैर-कानूनी इस्तेमाल पर जवाबतलब: किसी भी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति कमर्शियल फायदे या दुष्प्रचार के लिए करने पर कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है।
हमले को आजादी का नाम नहीं दिया जा सकता" — अनुज शर्मा
इस पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए विधायक अनुज शर्मा ने कहा, "मैं लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी का पूरा सम्मान करता हूं, लेकिन इसकी आड़ में किसी के परिवार की निजता और सम्मान की धज्जियां उड़ाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ही मुझे अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। मेरी लड़ाई जनता या मीडिया से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के इस खतरनाक दुरुपयोग के खिलाफ है।"