High Protein Diet: वजन कम करने, मसल्स बनाने और फिटनेस सुधारने के लिए इन दिनों हाई-प्रोटीन डाइट का चलन बढ़ गया है। अंडे, चिकन, मछली, पनीर, दाल, ग्रीक योगर्ट और प्रोटीन पाउडर जैसी चीजों को डाइट में शामिल किया जा रहा है। हालांकि, कुछ लोगों को प्रोटीन बढ़ाने के बाद कब्ज, पेट भारी लगना और मल त्याग में परेशानी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन क्या इसका सीधा कारण प्रोटीन है? ऐसा जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार समस्या कई बार प्रोटीन से ज्यादा फाइबर और पानी की कमी से जुड़ी होती है।
क्या हाई-प्रोटीन डाइट से कब्ज हो सकती है?
हाई-प्रोटीन डाइट कुछ लोगों में कब्ज की समस्या से जुड़ी हो सकती है, लेकिन प्रोटीन को कब्ज का सीधा कारण मानना सही नहीं होगा। दरअसल, जब लोग प्रोटीन की मात्रा बढ़ाते हैं तो कई बार रोटी, चावल, फल, सब्जियां, दाल और साबुत अनाज जैसे खाद्य पदार्थ कम कर देते हैं। इससे डाइट में फाइबर की मात्रा घट जाती है और कब्ज की समस्या हो सकती है।
उदाहरण के लिए:-
अगर कोई व्यक्ति पहले नाश्ते में ओट्स और फल, दोपहर में दाल-सब्जी-रोटी और शाम को फल खाता था, लेकिन हाई-प्रोटीन डाइट शुरू करने के बाद उसकी डाइट मुख्य रूप से अंडे, चिकन और प्रोटीन शेक तक सीमित हो गई, तो उसके भोजन में फाइबर की मात्रा काफी कम हो सकती है।
प्रोटीन बढ़ाने के बाद कब्ज क्यों होने लगती है?
1. डाइट में फाइबर कम होना यह कब्ज का एक प्रमुख कारण हो सकता है। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज कम करने से शरीर को मिलने वाला फाइबर घट जाता है। फाइबर मल को सामान्य बनाए रखने और आंतों की गतिविधि में मदद करता है। इसकी कमी से मल त्याग में परेशानी हो सकती है।
2. पानी कम पीना हाई-प्रोटीन डाइट लेते समय पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। पानी कम होने पर मल अधिक सख्त हो सकता है और कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। खासकर जब डाइट में फाइबर बढ़ाया जा रहा हो, तब पर्याप्त तरल लेना जरूरी है।
3. अचानक डाइट बदलना एकदम से प्रोटीन बढ़ाने और कार्बोहाइड्रेट या फाइबर कम करने से पाचन तंत्र को नई डाइट के साथ तालमेल बैठाने में समय लग सकता है। अचानक किए गए बदलाव से कुछ लोगों को कब्ज या पेट से जुड़ी दूसरी परेशानियां महसूस हो सकती हैं।
4. प्रोसेस्ड प्रोटीन फूड का ज्यादा सेवन प्रोटीन बार, रेडी-टू-ड्रिंक शेक और कुछ प्रोसेस्ड मीट में फाइबर कम हो सकता है। अगर इन चीजों की वजह से फल, सब्जियां और साबुत अनाज डाइट से बाहर हो जाते हैं, तो कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।
5. शारीरिक गतिविधि कम होना सिर्फ डाइट बदलना पर्याप्त नहीं है। अगर व्यक्ति रोजाना चलना-फिरना या एक्सरसाइज कम कर देता है, तो कब्ज की समस्या बनी रह सकती है। नियमित शारीरिक गतिविधि पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
हाई-प्रोटीन डाइट में कब्ज से कैसे बचें?
प्रोटीन बढ़ाते समय डाइट से फाइबर वाले खाद्य पदार्थों को पूरी तरह हटाने से बचें। चना, दाल, ओट्स, फल, सलाद, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल किए जा सकते हैं। इसके साथ पर्याप्त पानी पीना और रोजाना शारीरिक गतिविधि करना भी जरूरी है। डाइट में बदलाव धीरे-धीरे करने से शरीर को नई दिनचर्या के अनुसार ढलने में मदद मिल सकती है।
क्या प्रोटीन ही कब्ज की वजह है?
उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों से यह साबित नहीं होता कि हाई-प्रोटीन डाइट हर व्यक्ति में सीधे तौर पर कब्ज पैदा करती है। समस्या अक्सर तब बढ़ सकती है जब प्रोटीन बढ़ाने के साथ फाइबर, पानी और कुल भोजन की मात्रा कम हो जाए। इसलिए हाई-प्रोटीन डाइट लेते समय सिर्फ प्रोटीन की मात्रा पर ध्यान देने के बजाय प्रोटीन, फाइबर, पानी और संतुलित भोजन का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है।

