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Orthorexia Nervosa and Healthy Eating Obsession (Image source: Social media)
Orthorexia Nervosa and Healthy Eating Obsession (Image source: Social media)
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Orthorexia Nervosa: हेल्दी खाने की चाह कहीं बीमारी तो नहीं? जानिए क्या है ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा

Orthorexia Nervosa: ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा में हेल्दी या शुद्ध भोजन को लेकर अत्यधिक जुनून और कठोर नियम देखने को मिल सकते हैं। इससे खाने को लेकर चिंता, अपराधबोध और तनाव बढ़ने के साथ सोशल लाइफ और न्यूट्रिशन पर भी असर पड़ सकता है।

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प्रकाशित: 30 Aug 2026, 06:48 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 10:25 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

Orthorexia Nervosa:आज के समय में हेल्दी भोजन को लेकर जागरूकता बढ़ना अच्छी बात है। कम प्रोसेस्ड फूड खाना, पर्याप्त फल-सब्जियां लेना, चीनी और नमक का सेवन कम करना और बैलेंस्ड डाइट अपनाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन जब हेल्दी खाने की कोशिश इतनी बढ़ जाए कि व्यक्ति का पूरा जीवन खाने से जुड़े नियमों के इर्द-गिर्द घूमने लगे, तब यह चिंता का विषय हो सकता है।

इसी संदर्भ में Orthorexia Nervosa यानी ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें व्यक्ति हेल्दी या शुद्ध भोजन को लेकर अत्यधिक और कठोर नियम बना सकता है। इन नियमों से थोड़ा भी हटने पर उसे अपराधबोध, चिंता या तनाव महसूस हो सकता है। इसका असर धीरे-धीरे उसकी मानसिक शांति, खान-पान और सामाजिक जीवन पर पड़ सकता है।

ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा क्या है?

ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा शब्द का इस्तेमाल ऐसे व्यवहार के लिए किया जाता है, जिसमें व्यक्ति “हेल्दी” या “प्योर” भोजन खाने को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंतित और प्रतिबंधित हो जाता है। उसका ध्यान सिर्फ पौष्टिक भोजन लेने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह खाने की शुद्धता को लेकर लगातार सोचने लगता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि Orthorexia Nervosa को अभी DSM-5 या ICD में एक स्वतंत्र आधिकारिक मानसिक रोग के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए इसे लेकर किसी व्यक्ति का खुद से निदान करना उचित नहीं है।

सिर्फ हेल्दी खाना पसंद करना ऑर्थोरेक्सिया नहीं

हेल्दी डाइट अपनाना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। कोई व्यक्ति पौष्टिक भोजन को प्राथमिकता दे सकता है, प्रोसेस्ड फूड कम कर सकता है या चीनी का सेवन घटा सकता है और फिर भी कभी-कभार अपनी पसंद की चीजें खा सकता है। फर्क तब नजर आता है जब खाने को लेकर बनाए गए नियम इतने कठोर हो जाएं कि व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे। उदाहरण के लिए, पिज्जा, मिठाई या किसी रेस्टोरेंट के खाने को लेकर इतना डर पैदा हो जाए कि व्यक्ति सामाजिक कार्यक्रमों में जाना ही छोड़ दे।

हेल्दी ईटिंग और ऑर्थोरेक्सिया में क्या अंतर है?

दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर फ्लेक्सिबिलिटी और मनोवैज्ञानिक असर का है। हेल्दी ईटिंग में व्यक्ति जरूरत और परिस्थिति के अनुसार अपने खान-पान में बदलाव कर सकता है। वहीं ऑर्थोरेक्सिक व्यवहार में व्यक्ति अपने लिए खाने के बहुत सख्त नियम बना सकता है। कुछ खाद्य पदार्थों को पूरी तरह खराब या असुरक्षित मानकर उनसे हर स्थिति में बचने की कोशिश की जा सकती है। नियम टूटने पर अपराधबोध या चिंता बढ़ सकती है।

खाने का चुनाव करने में बहुत ज्यादा समय लगना

क्या खरीदना है, पैकेट पर क्या लिखा है, सामग्री कहां से आई है और खाना किस तरह तैयार किया गया है—इन बातों को जांचने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लग सकता है। रेस्टोरेंट या बाहर खाना खाते समय भी व्यक्ति मेन्यू में उपलब्ध विकल्पों को लेकर काफी तनाव महसूस कर सकता है।

अगर व्यक्ति अपने बनाए नियमों से हटकर कुछ खा ले और इसके बाद उसे अत्यधिक अपराधबोध, डर या तनाव महसूस हो, तो यह चिंता का संकेत हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति अगले भोजन में खुद को ज्यादा प्रतिबंधित करने या पहले खाए भोजन की भरपाई करने की कोशिश भी कर सकता है।

खाने के डर से सोशल लाइफ से दूरी

पार्टी, शादी, रेस्टोरेंट या दोस्तों के साथ बाहर खाना सामान्य सामाजिक गतिविधियों का हिस्सा है। लेकिन अगर व्यक्ति को लगता है कि वहां उसके नियमों के मुताबिक “परफेक्ट हेल्दी” खाना नहीं मिलेगा और इसी वजह से वह कार्यक्रमों से बचने लगे, तो इसका असर उसकी सोशल लाइफ पर पड़ सकता है।

धीरे-धीरे व्यक्ति दोस्तों और परिवार के साथ खाना खाने से भी बच सकता है।

डाइट में विविधता कम होना

बहुत अधिक प्रतिबंधित डाइट से खाने के विकल्प कम हो सकते हैं। कुछ मामलों में इससे पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, फैट, विटामिन और मिनरल्स लेना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति में इससे कुपोषण होगा, ऐसा कहना सही नहीं है। इसका असर व्यक्ति की पूरी डाइट और उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर निर्भर करता है।

कब लेनी चाहिए एक्सपर्ट की मदद?

अगर खाने से जुड़े नियम आपकी रोजमर्रा की जिंदगी, सामाजिक संबंधों या मानसिक शांति को प्रभावित करने लगें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बार-बार भोजन को लेकर चिंता होना, खाने के बाद अत्यधिक अपराधबोध महसूस करना या लगातार खाद्य पदार्थों को लेकर डर बने रहना मदद लेने का कारण हो सकता है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर, डाइटिशियन या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। विशेषज्ञ व्यक्ति के खान-पान और व्यवहार का आकलन करके यह समझने में मदद कर सकते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है और किस तरह की सहायता की जरूरत है।

हेल्दी खाना अच्छी आदत है, लेकिन संतुलन जरूरी

ऑर्थोरेक्सिया नर्वोसा का मतलब सिर्फ हेल्दी खाना पसंद करना नहीं है। चिंता तब बढ़ती है जब हेल्दी या शुद्ध भोजन को लेकर जुनून इतना ज्यादा हो जाए कि व्यक्ति की मानसिक शांति, न्यूट्रिशन, सोशल लाइफ और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे। इसलिए हेल्दी डाइट के साथ फ्लेक्सिबिलिटी और संतुलन भी जरूरी है। किसी भी खाने को लेकर अत्यधिक डर या अपराधबोध महसूस करने के बजाय अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार संतुलित आहार लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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