महिला एवं बाल विकास विभाग तथा ‘गढ़बो बचपन परियोजना’ की संयुक्त पहल के तहत रायपुर जिले के 1,941 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहली बार 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों का व्यवस्थित शैक्षणिक एवं विकासात्मक आकलन किया गया। इस अभियान के अंतर्गत लगभग 8,000 बच्चों को ‘विद्यारंभ प्रमाण पत्र’ वितरित किए गए, जबकि करीब 15,000 पालकों ने विशेष बैठकों में शामिल होकर अपने बच्चों की प्रगति संबंधी जानकारी प्राप्त की।
आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित इन बैठकों में बच्चों के सीखने की क्षमता, बौद्धिक विकास और प्रारंभिक दक्षताओं के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर तैयार रिपोर्ट कार्ड अभिभावकों को सौंपे गए। वहीं प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश के लिए तैयार नौनिहालों को ‘विद्यारंभ प्रमाण पत्र’ देकर सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक नींव मजबूत करना उद्देश्य
इस पहल का उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास का व्यवस्थित मूल्यांकन कर उसकी जानकारी सीधे परिवारों तक पहुंचाना है, ताकि पालक अपने बच्चों की मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभा सकें। आकलन के परिणाम साझा किए जाने से अभिभावकों को यह समझने में भी मदद मिली कि किन क्षेत्रों में बच्चों को अतिरिक्त सहयोग और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
गुणवत्ता को मिलेगी नई दिशा
जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर ने बताया कि बच्चों के शुरुआती विकास में परिवार की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है। उनके अनुसार, रायपुर जिले के सभी 1,941 आंगनबाड़ी केंद्रों में पहली बार लागू की गई यह पहल आंगनबाड़ी और परिवार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी तथा बच्चों की सीखने की गुणवत्ता को नई दिशा देगी। उन्होंने विश्वास जताया कि आकलन आधारित यह संवाद भविष्य में बच्चों की मजबूत शैक्षणिक नींव तैयार करने में सहायक सिद्ध होगा।
उत्साहपूर्ण रहा माहौल
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्थानीय समुदाय के सदस्यों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। ‘विद्यारंभ प्रमाण पत्र’ प्राप्त करने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। पूरे आयोजन में उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला और इसे प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया।