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बूंद-बूंद को तरस रहा पाकिस्तान
बूंद-बूंद को तरस रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान में हाहाकार : सिंधु जल संधि रुकने से सिंध और बलूचिस्तान में सूखा, खेती चौपट होने का खतरा

भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से रोकने के फैसले का असर पाकिस्तान में दिखाई देने लगा है। सिंध और बलूचिस्तान समेत कई इलाकों में पानी की भारी कमी की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

प्रकाशित: 13 Jun 2026, 03:28 PM · अपडेट: 14 Jun 2026, 11:30 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला पाकिस्तान इन दिनों बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहा है। भारत की तरफ से सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत में पानी का भयानक संकट खड़ा हो गया है। इस जल संकट के कारण वहां के बड़े कृषि क्षेत्रों में आर्थिक तबाही का खतरा मंडराने लगा है। दशकों पुरानी इस नदी जल संधि को रोकने का फैसला भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए पाकिस्तानी प्रायोजित आतंकी हमले के बाद लिया था, जिसके कुछ ही महीनों के भीतर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर टूटती नजर आ रही है।

आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं: रक्षा मंत्री

पहलगाम हमले के बाद नई दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत सैन्य कार्रवाई तो की ही, साथ ही कूटनीतिक स्तर पर सिंधु जल संधि को भी सस्पेंड कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत के इस सख्त रुख को दोहराते हुए हाल ही में साफ कहा था कि जिनकी आंखों के आंसू सूख चुके हैं, वे हमसे पानी की उम्मीद न रखें। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत सिंधु नदी का पानी आतंकवादियों के आकाओं और इंसानियत के दुश्मनों तक किसी भी कीमत पर नहीं पहुंचने देगा। भारत के इस कदम ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और सामान्य रिश्ते एक साथ नहीं चल सकते।

सिंध प्रांत की नहरें सूखीं, कृषि संकट गहराया

पाकिस्तानी मीडिया हाउस 'डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, इस कड़े फैसले का सबसे बुरा असर सिंध प्रांत पर पड़ा है, जो पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची का हिस्सा है। सिंधु नदी पर बना सुक्कुर बैराज, जो लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का मुख्य जरिया है, वहां पानी का स्तर खतरनाक रूप से गिर चुका है। आंकड़ों के मुताबिक, सिंध की प्रमुख नहरों में पानी की भारी किल्लत हो गई है। दादू नहर में जहां 82 प्रतिशत पानी कम हो गया है, वहीं नॉर्थ वेस्ट नहर में 64 प्रतिशत और राइस नहर में 38 प्रतिशत पानी की कमी दर्ज की गई है। दादू नहर को उसके तय हिस्से 4,995 क्यूसेक (पानी मापने की इकाई) के मुकाबले अभी सिर्फ 860 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा है।

पानी के बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े पाकिस्तानी सूबे

इस गंभीर संकट ने पाकिस्तान के भीतर आपसी राजनीतिक लड़ाई और आंतरिक मतभेदों को भी उजागर कर दिया है। सिंध प्रांत के सिंचाई विभाग ने आरोप लगाया है कि पंजाब प्रांत अपने तय कोटे से 21 प्रतिशत ज्यादा पानी अवैध रूप से निकाल रहा है, जिससे निचले इलाकों में सूखा पड़ गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के नेताओं ने इसे सिंध का आर्थिक नरसंहार बताया है, क्योंकि अकेले सिंध प्रांत से हर साल 1.4 अरब डॉलर के चावल का निर्यात होता है। दूसरी तरफ, जमात-ए-इस्लामी जैसी विपक्षी पार्टियों ने स्थानीय सरकार के खराब प्रबंधन और कमजोर बुनिदी ढांचे को इस बदहाली का जिम्मेदार ठहराया है। भारत के सख्त रुख और अंदरूनी खींचतान के बीच पाकिस्तान के लिए आने वाले दिन और भी मुश्किल भरे होने वाले हैं।
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