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ऑपरेशन थिएटर में चींटियां मिलने के बाद बंद हुई सर्जरी
ऑपरेशन थिएटर में चींटियां मिलने के बाद बंद हुई सर्जरी
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दुर्ग जिला अस्पताल में लचर व्यवस्था : चींटियों के आतंक से 3 दिन थमा मदर-चाइल्ड OT, सर्जरी ठप

दुर्ग जिला अस्पताल की मदर-चाइल्ड यूनिट के ऑपरेशन थिएटर में बड़ी संख्या में चींटियां मिलने के बाद संक्रमण के खतरे को देखते हुए सीजर डिलीवरी के ऑपरेशन रोक दिए गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने OT को अस्थायी रूप से सील कर पेस्ट कंट्रोल और फ्यूमिगेशन शुरू कराया है।

कीर्तिमान न्यूज
31 Jul 2026, 10:41 AM
दुर्ग
छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित जिला अस्पताल से सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की बदहाली को उजागर करने वाली एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल की मदर-चाइल्ड यूनिट (MCU) के ऑपरेशन थिएटर में अचानक भारी संख्या में चींटियों की फौज घुस आई, जिसके कारण पिछले तीन दिनों से सिजेरियन डिलीवरी के सारे ऑपरेशन रोकने पड़े हैं। संक्रमण (Infection) फैलने की आशंका को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने आनन-फानन में इस ओटी को अस्थायी रूप से सील कर दिया है।

चींटियों के इस अप्रत्याशित हमले से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:

  • सर्जरी शिफ्ट की गईं: इमरजेंसी और सीजर ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को जिला अस्पताल के 'मेजर ओटी' (Major OT) में भेजा गया।

  • दूसरे ऑपरेशन अटके: मेजर ओटी पर अचानक दबाव बढ़ने के कारण वहां पहले से निर्धारित आर्थोपेडिक (हड्डी) और अन्य सामान्य प्लान्ड सर्जरीज को टालना पड़ा।

  • रोजाना का नुकसान: अस्पताल में औसतन हर दिन 5 ऑपरेशन टालने पड़े हैं, हालांकि आपातकालीन मामलों को किसी तरह संभाला गया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने संवेदनशील इलाके (ऑपरेशन थिएटर) तक इतनी बड़ी संख्या में चींटियां पहुंची कैसे? 

  • जर्जर इमारत: अस्पताल का भवन काफी पुराना है।
  • दीवारों और फर्श में दरारें: टाइल्स उखड़ने और दरारों की समय पर मरम्मत न होने से चींटियों को अंदर आने का रास्ता मिल गया।
  • पेस्ट कंट्रोल की अनदेखी: समय-समय पर होने वाले पेस्ट कंट्रोल में ढिलाई को भी इस बड़ी गड़बड़ी की मुख्य वजह माना जा रहा है।
स्वास्थ्य प्रशासन का क्या कहना है?
मामला तूल पकड़ते ही अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया और प्रभावित हिस्से में तुरंत पेस्ट कंट्रोल, पेस्टीसाइड छिड़काव और फ्यूमिगेशन (Fumigation) का काम शुरू कराया गया।
"संक्रमण का खतरा शून्य करने की कोशिश जारी" 
"संक्रमण के जोखिम को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त मानक प्रक्रियाएं (SOPs) अपनाई जा रही हैं। किसी भी मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर नहीं किया गया है, सभी जरूरी ऑपरेशन वैकल्पिक ओटी में हो रहे हैं। फ्यूमिगेशन पूरा होते ही 2-3 दिनों के भीतर मदर-चाइल्ड ओटी को दोबारा चालू कर दिया जाएगा। हम इसका स्थायी समाधान निकाल रहे हैं।" — डॉ. आशीष मिंज, सिविल सर्जन
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन मरम्मत और गहरी सफाई के दावे कर रहा है, लेकिन इस घटना ने जिला अस्पताल के मेंटेनेंस और स्वच्छता मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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