चींटियों के इस अप्रत्याशित हमले से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है:
सर्जरी शिफ्ट की गईं: इमरजेंसी और सीजर ऑपरेशन कराने के लिए मरीजों को जिला अस्पताल के 'मेजर ओटी' (Major OT) में भेजा गया।
दूसरे ऑपरेशन अटके: मेजर ओटी पर अचानक दबाव बढ़ने के कारण वहां पहले से निर्धारित आर्थोपेडिक (हड्डी) और अन्य सामान्य प्लान्ड सर्जरीज को टालना पड़ा।
रोजाना का नुकसान: अस्पताल में औसतन हर दिन 5 ऑपरेशन टालने पड़े हैं, हालांकि आपातकालीन मामलों को किसी तरह संभाला गया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतने संवेदनशील इलाके (ऑपरेशन थिएटर) तक इतनी बड़ी संख्या में चींटियां पहुंची कैसे?
- जर्जर इमारत: अस्पताल का भवन काफी पुराना है।
- दीवारों और फर्श में दरारें: टाइल्स उखड़ने और दरारों की समय पर मरम्मत न होने से चींटियों को अंदर आने का रास्ता मिल गया।
- पेस्ट कंट्रोल की अनदेखी: समय-समय पर होने वाले पेस्ट कंट्रोल में ढिलाई को भी इस बड़ी गड़बड़ी की मुख्य वजह माना जा रहा है।
"संक्रमण का खतरा शून्य करने की कोशिश जारी""संक्रमण के जोखिम को पूरी तरह खत्म करने के लिए सख्त मानक प्रक्रियाएं (SOPs) अपनाई जा रही हैं। किसी भी मरीज को दूसरे अस्पताल में रेफर नहीं किया गया है, सभी जरूरी ऑपरेशन वैकल्पिक ओटी में हो रहे हैं। फ्यूमिगेशन पूरा होते ही 2-3 दिनों के भीतर मदर-चाइल्ड ओटी को दोबारा चालू कर दिया जाएगा। हम इसका स्थायी समाधान निकाल रहे हैं।" — डॉ. आशीष मिंज, सिविल सर्जन