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माता-पिता बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाते हुए
माता-पिता बच्चों को अच्छे संस्कार सिखाते हुए
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माता- पिता के लिए जरुरी सलाह : अपने बच्चों को सिखाएं अच्छी आदतें और अच्छे संस्कार

बच्चों की सफलता केवल पढ़ाई और अच्छे अंकों से तय नहीं होती। सम्मान, ईमानदारी, विनम्रता, मदद करने की आदत और दूसरों की भावनाओं का सम्मान जैसे जीवन मूल्य उन्हें जिम्मेदार, संवेदनशील और सफल इंसान बनने में मदद करते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
26 Jun 2026, 04:16 PM
रायपुर
हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करे और भविष्य में सफल बने। लेकिन केवल अच्छी शिक्षा ही जीवन में सफलता की गारंटी नहीं होती। अगर बच्चे में अच्छे संस्कार, विनम्रता और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना नहीं होगी, तो वह कई जगह पीछे रह सकता है। इसलिए जरूरी है कि कम उम्र से ही बच्चों को ऐसे जीवन मूल्य सिखाए जाएं, जो उन्हें एक जिम्मेदार और संवेदनशील इंसान बनने में मदद करें। 
आजकल कई अभिभावक बच्चों की पढ़ाई, परीक्षा और अच्छे अंकों पर इतना ध्यान देते हैं कि उनके व्यवहार और व्यक्तित्व के विकास पर पर्याप्त समय नहीं दे पाते। इसका असर आगे चलकर देखने को मिलता है। कई बार बच्चा पढ़ाई में तो सफल हो जाता है, लेकिन उसके व्यवहार के कारण लोग उसकी परवरिश पर सवाल उठाने लगते हैं। ऐसे में बचपन से ही सही आदतें और अच्छे संस्कार देना बेहद जरूरी हो जाता है। 

बच्चों को सम्मानपुर्वक व्यवाहर करना सिखाएं

बच्चों को शुरुआत से ही यह समझाना चाहिए कि बड़ों के साथ हमेशा सम्मानपूर्वक व्यवहार करें। चाहे नमस्ते करना हो, आदर से बात करना हो या परिवार की परंपरा के अनुसार सम्मान व्यक्त करना हो, इन आदतों को उनकी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। साथ ही उन्हें यह भी सिखाएं कि अपने से छोटे लोगों के साथ प्यार, धैर्य और सम्मान से पेश आएं। इससे उनके भीतर संवेदनशीलता और अच्छे संस्कार स्वाभाविक
माता-पिता अपने बच्चों को सिखाएं अच्छी आदतें और अच्छे संस्कार 
रूप से विकसित होते हैं। बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि किसी भी उपलब्धि पर घमंड नहीं करना चाहिए। पढ़ाई, खेल, पैसा या किसी विशेष प्रतिभा के कारण खुद को दूसरों से बेहतर समझना सही नहीं है। उन्हें बताएं कि हर व्यक्ति की अपनी अलग क्षमता और विशेषता होती है। जब बच्चा अपनी सफलता के साथ दूसरों की उपलब्धियों का भी सम्मान करना सीखता है, तब उसके अंदर आत्मविश्वास तो बढ़ता है, लेकिन अहंकार नहीं आता।

जरुरत मंद लोगों की मदद करने की आदत डालें 

दूसरों की मदद करना एक ऐसा गुण है, जो बचपन से ही विकसित किया जा सकता है। बच्चों को सिखाएं कि यदि कोई व्यक्ति किसी परेशानी में हो, तो अपनी क्षमता के अनुसार उसकी सहायता करें। यह मदद केवल आर्थिक नहीं होती, बल्कि किसी का हौसला बढ़ाना, समय देना या छोटी-सी मदद करना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। ऐसी आदतें बच्चों में दया, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना पैदा करती हैं। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि हर व्यक्ति की सोच, परिस्थितियां और अनुभव अलग-अलग होते हैं। इसलिए बिना पूरी बात जाने किसी के बारे में राय बनाना या उसका मजाक उड़ाना ठीक नहीं है। जब बच्चे दूसरों की भावनाओं को समझना और उनका सम्मान करना सीखते हैं, तो उनके रिश्ते मजबूत बनते हैं और वे अधिक संवेदनशील इंसान बनते हैं। 

सच बोलना और अपनी गलती स्वीकार कारण सिखाएं

ईमानदारी और अपनी गलती मानने का साहस एक अच्छे व्यक्तित्व की पहचान है। बच्चों को बचपन से ही यह सिखाना चाहिए कि गलती होने पर उसे छिपाने या किसी और पर दोष डालने के बजाय उसे स्वीकार करें और उससे सीख लें। ऐसा करने से उनमें जिम्मेदारी की भावना बढ़ती है और वे भविष्य में बेहतर फैसले लेने के योग्य बनते हैं।  बच्चों को केवल अच्छी शिक्षा दिलाना ही माता-पिता की जिम्मेदारी नहीं है। उन्हें ऐसे संस्कार देना भी उतना ही जरूरी है, जो जीवनभर उनके काम आएं। सम्मान, विनम्रता, ईमानदारी, मदद करने की भावना और दूसरों की भावनाओं की कद्र जैसे गुण बच्चे को न सिर्फ एक अच्छा इंसान बनाते हैं, बल्कि समाज में सम्मान और मजबूत रिश्ते बनाने में भी मदद करते हैं।
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