सुअरमार गढ़ में खुदाई के दौरान मिला रहस्यमयी धातु अवशेष, क्या छिपे हैं मध्यकालीन इतिहास के राज?
सुअरमार गढ़ क्षेत्र में मकान निर्माण के दौरान करीब तीन फीट की गहराई से स्वर्ण रंग का धातु अवशेष मिला है। मौके से पुरानी खपरैल और काली मिट्टी भी मिली है। स्थानीय लोगों ने वैज्ञानिक परीक्षण और पुरातात्त्विक सर्वेक्षण की मांग की है।
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कीर्तिमान न्यूज
12 Aug 2026, 07:37 AM
महासमुंद
छत्तीसगढ़ के पूर्वी अंचल में स्थित ऐतिहासिक सुअरमार गढ़ एक बार फिर अपनी प्राचीन विरासत को लेकर चर्चा में आ गया है। हाल ही में कोमाखान इलाके में एक रिहायशी मकान के निर्माण कार्य के दौरान जमीन के भीतर से सोने जैसी चमकने वाली एक अनूठी धातु पट्टी (मेटल ऑब्जेक्ट) बरामद हुई है। इस खोज के बाद से ही क्षेत्र में पुरातत्व और इतिहास के शौकीनों के बीच हलचल काफी बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, कोमाखान निवासी विजय कुमार पांडे अपने नए मकान की नींव के लिए जमीन की खुदाई करवा रहे थे।
आधिकारिक पुष्टि होना बाकी
जब मजदूर लगभग तीन फीट की गहराई पर पहुंचे, तब उन्हें काली मिट्टी के बीच पुरानी खपरैल (मिट्टी की टाइलें) और यह चमकीली धातु का टुकड़ा मिला। देखने में यह धातु चपटी, अनियमित आकार की और मुड़ी हुई है। इसकी सतह पर जिस तरह के निशान हैं, उससे ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इसे हथौड़े या किसी औजार से पीटकर तैयार किया गया होगा। प्रथम दृष्टया स्थानीय लोग इसे सोने का पत्र या आभूषण का हिस्सा मान रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक और वैज्ञानिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
स्थल पर मिले पुराने अवशेषपरीक्षण से ही होगी सही जानकारी
घटनास्थल से जिस तरह की काली मिट्टी और पुरानी खपरैल के टुकड़े मिले हैं, उससे विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि अतीत में यह कोई साधारण जगह नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित आवासीय परिसर या कोई संरक्षित गढ़ का हिस्सा रहा होगा। हालांकि, केवल सतह पर मिले अवशेषों के आधार पर किसी निश्चित कालखंड का दावा करना अभी जल्दबाजी होगी।पुरातत्वविदों का कहना है कि इस अवशेष की वास्तविक सच्चाई जानने के लिए इसका 'XRF' (एक्स-रे फ्लोरेसेंस) या अन्य आधुनिक लैब टेस्ट कराया जाना बेहद जरूरी है। इस परीक्षण से ही यह साफ हो पाएगा कि यह वस्तु कोई प्राचीन स्वर्णपत्र (गोल्ड फॉयल), धार्मिक प्रतिमा का हिस्सा है, या फिर किसी मध्यकालीन शाही अलंकरण का कोई अंश।
स्थानीय लोगों ने की पुरातात्विक सर्वेक्षण की मांग
सुअरमार गढ़ अपने आप में कई ऐतिहासिक गाथाओं को समेटे हुए है। स्थानीय नागरिकों और इतिहास में रुचि रखने वाले विशेषज्ञों ने पुरातत्व विभाग से मांग की है कि:
प्राप्त धातु अवशेष को तुरंत राजकीय संरक्षण में लिया जाए।
जिस जगह यह अवशेष मिला है, वहां 'स्तरीय खुदाई' (Stratigraphic Excavation) कराकर आसपास की मिट्टी और खपरैल का दस्तावेजीकरण किया जाए।
सुअरमार गढ़ क्षेत्र का एक व्यापक और वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए ताकि इस क्षेत्र के प्राचीन शिल्प, सामाजिक संरचना और इतिहास की नई कड़ियों को जोड़ा जा सके।
यदि वैज्ञानिक जांच में यह अवशेष प्राचीन साबित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ के प्राचीन धातु-शिल्प और सुअरमार गढ़ के भुला दिए गए इतिहास को उजागर करने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।