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ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच बढ़ते राजनीतिक दबाव
ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच बढ़ते राजनीतिक दबाव
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ट्रम्प के गाजा समझौते के दावे के बीच बढ़ा दबाव, नेतन्याहू के सामने अमेरिका और घरेलू राजनीति की दोहरी चुनौती

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के गाजा समझौते के दावे के बाद इजराइल की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर एक ओर अमेरिका की अपेक्षाओं को पूरा करने और दूसरी ओर अपने दक्षिणपंथी सहयोगियों व चुनावी समीकरणों को संतुलित रखने का दबाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में इजराइल की गाजा से पूरी सैन्य वापसी की संभावना बेहद कम है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 01 Aug 2026, 04:35 PM · अपडेट: 18 Sep 2026, 11:07 AM
अमेरिका
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा गाजा को लेकर एक बड़े समझौते का दावा किए जाने के बाद इजराइल की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। ट्रम्प ने कहा कि हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार हो गया है और इसके बाद इजराइली सेना गाजा से पीछे हट सकती है। हालांकि इजराइल सरकार की ओर से इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसी चुप्पी ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इजराइल के भीतर सरकार के कई वरिष्ठ नेता और राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जब तक हमास पूरी तरह निहत्था होने की ठोस गारंटी नहीं देता, तब तक गाजा से सेना हटाने का फैसला संभव नहीं है। ऐसे में ट्रम्प के दावे और इजराइल की वास्तविक रणनीति के बीच अंतर साफ दिखाई दे रहा है।

गाजा से सेना हटाने का मुद्दा क्यों बना विवाद ? 

7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू किया था। इसके बाद से गाजा में भारी तबाही हुई और हजारों लोगों की मौत हुई। इस लंबे संघर्ष के बावजूद इजराइल के भीतर बड़ी संख्या में लोग अब भी सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में हैं। हाल में सामने आए एक सर्वे के अनुसार, बड़ी संख्या में यहूदी इजराइली नागरिक गाजा में कठोर सुरक्षा नीति बनाए रखने का समर्थन करते हैं। कई लोगों का मानना है कि यदि सेना पूरी तरह पीछे हट गई तो हमास फिर से खुद को संगठित कर भविष्य में बड़े हमले कर सकता है। यही कारण है कि गाजा से सैन्य वापसी का प्रस्ताव देश के भीतर व्यापक समर्थन नहीं जुटा पा रहा है। 

सरकार के सहयोगी नेताओं ने जताई कड़ी आपत्ति 

नेतन्याहू सरकार के कई प्रभावशाली नेताओं ने ट्रम्प के प्रस्तावित समझौते पर खुलकर आपत्ति जताई है। वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह हथियार नहीं छोड़ता, तब तक सेना हटाने का कोई सवाल नहीं उठता। उन्होंने भविष्य में गाजा पर इजराइल का नियंत्रण बनाए रखने और वहां यहूदी बस्तियों के विस्तार की भी वकालत की। राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने भी सैन्य कार्रवाई जारी रखने की पैरवी करते हुए कहा कि हमास पर दबाव कम करना इजराइल की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकता है। वहीं पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट, जिन्हें आगामी चुनाव में नेतन्याहू का प्रमुख प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है, ने भी चेतावनी दी कि यदि हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत पूरी तरह खत्म नहीं होती तो इसे इजराइल की रणनीतिक विफलता माना जाएगा।

नेतन्याहू के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती 

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अब तक इस पूरे मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी चुप्पी इस बात का संकेत है कि वे बेहद कठिन राजनीतिक परिस्थिति का सामना कर रहे हैं। एक ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस समझौते को अपनी बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि दूसरी ओर नेतन्याहू के दक्षिणपंथी सहयोगी किसी भी कीमत पर गाजा से सेना हटाने के खिलाफ हैं। यदि नेतन्याहू सैन्य वापसी के पक्ष में जाते हैं तो चुनाव से पहले उनका पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। वहीं यदि वे समझौते को पूरी तरह नकार देते हैं तो अमेरिका के साथ संबंधों पर असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू सीमित स्तर पर कुछ इलाकों से सेना की तैनाती कम करने जैसे कदम उठा सकते हैं, लेकिन गाजा से पूरी तरह पीछे हटने की संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई देती है। 

अमेरिका से रिश्ते भी बने बड़ी प्राथमिकता 

विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू के लिए अमेरिका का समर्थन केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम है। अमेरिकी सैन्य सहायता और सुरक्षा सहयोग इजराइल की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में चुनाव से पहले ट्रम्प प्रशासन के साथ रिश्तों में तनाव पैदा करना नेतन्याहू के लिए जोखिम भरा फैसला हो सकता है। राजनीतिक जानकारों का यह भी मानना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का सामना कर रहे नेतन्याहू भविष्य में ट्रम्प के राजनीतिक समर्थन की उम्मीद भी लगाए हुए हैं। इसके अलावा सऊदी अरब और इजराइल के बीच संभावित संबंध सामान्यीकरण जैसे बड़े कूटनीतिक प्रयास भी उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं।

क्या गाजा से पूरी तरह सेना हटेगी ? 

मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि इजराइल का गाजा से पूरी तरह सैन्य वापसी करना फिलहाल संभव नहीं दिखता। माना जा रहा है कि समझौते को आगे बढ़ाने के लिए कुछ प्रतीकात्मक कदम जरूर उठाए जा सकते हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों और घरेलू राजनीतिक दबाव के चलते पूर्ण सैन्य वापसी की संभावना बेहद सीमित है। विश्लेषकों के अनुसार, चुनाव नजदीक आने के साथ नेतन्याहू की प्राथमिकता सुरक्षा नीति को सख्त बनाए रखना और अपने राजनीतिक समर्थन को मजबूत करना होगी। ऐसे में गाजा से पूरी तरह पीछे हटने के बजाय सीमित और नियंत्रित रणनीति अपनाने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
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