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भारतीय मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा भरोसा।
भारतीय मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम पर बढ़ा भरोसा।
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भारत : आर्मेनिया की नजर भारत की ‘प्रलय’ मिसाइल पर, रक्षा साझेदारी को मिल सकती है नई ताकत

दक्षिण कॉकस क्षेत्र में बदलते सामरिक हालात के बीच आर्मेनिया भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक आर्मेनिया भारत की अत्याधुनिक ‘प्रलय’ बैलिस्टिक मिसाइल, Akash-NG एयर डिफेंस सिस्टम और Su-30SM लड़ाकू विमानों के अपग्रेड को लेकर बातचीत कर रहा है। अजरबैजान संघर्ष के बाद रूसी हथियारों पर भरोसा कम होने से आर्मेनिया अब भारतीय रक्षा तकनीक को अधिक विश्वसनीय मान रहा है। विशेषज्ञ इसे भारत की रक्षा कूटनीति और वैश्विक रक्षा निर्यात के लिए बड़ा अवसर मान रहे हैं।

कीर्तिमान नेटवर्क
25 May 2026, 11:52 AM
📍 नई दिल्ली
दक्षिण कॉकस क्षेत्र में इस समय भू-राजनीतिक और सैन्य हालत तेजी से बदल रहे हैं। आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच लंबे समय से जारी तनाव, सीमा विवाद और क्षेत्रीय संघर्षों ने पूरे इलाके को संवेदनशील बना दिया है। इसी बीच आर्मेनिया अब अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए नए रणनीतिक साझेदारों की तलाश में जुटा हुआ है।आर्मेनिया भारत के साथ रक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहा है। आर्मेनिया भारत की अत्याधुनिक ‘प्रलय’ टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल, Akash-NG एयर डिफेंस सिस्टम और अपने Su-30SM लड़ाकू विमानों के अपग्रेड को लेकर उन्नत स्तर पर बातचीत कर रहा है,आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बड़ा रक्षा समझौता हो सकता है।

भारतीय हथियारों पर भरोसा

पिछले कुछ वर्षों में आर्मेनिया ने भारतीय रक्षा उपकरणों की खरीदी में तेजी लाइ है। खासकर अजरबैजान के साथ संघर्ष के दौरान रूसी हथियारों की सीमित प्रभावशीलता सामने आने के बाद आर्मेनिया अब वैकल्पिक रक्षा साझेदारों की ओर देख रहा है। इसी दौरान भारत ने खुद को एक भरोसेमंद रक्षा सहयोगी के रूप में स्थापित किया है। भारत पहले ही आर्मेनिया को पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार उपलब्ध करा चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन सिस्टम्स का प्रदर्शन आर्मेनिया के लिए संतोषजनक रहा है, जिसके बाद भारतीय हथियारों को लेकर उसका भरोसा और मजबूत हुआ है।  भारत की रक्षा तकनीक अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी से अपनी जगह बना रही है। यही वजह है कि कई देश अब रूस और पश्चिमी देशों के विकल्प के तौर पर भारत की ओर देख रहे हैं।

प्रलय मिसाइल  क्या है

प्रलय भारत द्वारा विकसित एक अत्याधुनिक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे युद्ध के दौरान दुश्मन के सैन्य ठिकानों, रडार सिस्टम, एयर डिफेंस यूनिट्स और रणनीतिक ठिकानों को तेजी से निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है। यह मिसाइल कम दूरी में भी बेहद सटीक हमला करने की क्षमता रखती है।  प्रलय मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी हाई स्पीड, लो-फ्लाइट प्रोफाइल और अत्यधिक सटीकता है। यही कारण है कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के लिए भी इसे रोकना काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यह मिसाइल दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य ढांचे को बहुत कम समय में भारी नुकसान पहुंचा सकती है। यदि आर्मेनिया इस मिसाइल को हासिल करने में सफल होता है, तो यह दक्षिण कॉकस क्षेत्र में उसकी सामरिक स्थिति को काफी मजबूत कर सकता है। साथ ही यह भारत के रक्षा निर्यात इतिहास में भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

Akash-NG और फाइटर जेट 

आर्मेनिया केवल मिसाइल सिस्टम खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपने पूरे एयर डिफेंस नेटवर्क और वायुसेना को आधुनिक बनाना चाहता है। इसी उद्देश्य से वह भारत के Akash-NG एयर डिफेंस सिस्टम में भी दिलचस्पी दिखा रहा है। Akash-NG भारत का अगली पीढ़ी का एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसे दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन, हेलीकॉप्टर और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी रेंज और प्रतिक्रिया क्षमता पहले के सिस्टम्स की तुलना में कहीं अधिक उन्नत मानी जाती है। इसके अलावा आर्मेनिया अपने रूसी मूल के Su-30SM लड़ाकू विमानों को आधुनिक हथियारों और भारतीय तकनीक से अपग्रेड करने पर भी विचार कर रहा है। माना जा रहा है कि भारत इस क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग दे सकता है।

रूस से दूरी, सहयोगियों की तलाश

लंबे समय तक आर्मेनिया अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में बदले हालात ने उसे नई रणनीति अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की वैश्विक स्थिति और हथियार आपूर्ति प्रणाली पर भी असर पड़ा है। ऐसे में आर्मेनिया अब भारत, फ्रांस और कुछ अन्य देशों के साथ अपने रक्षा संबंध मजबूत कर रहा है। भारत के साथ बढ़ती साझेदारी को इसी बड़े रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है।  भारत और आर्मेनिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग केवल सैन्य सौदा नहीं है, बल्कि यह दक्षिण कॉकस क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

भारत की रक्षा कूटनीति

भारत पिछले कुछ वर्षों से ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। इसका असर अब वैश्विक रक्षा बाजार में भी दिखाई देने लगा है। ब्रह्मोस, आकाश, पिनाका और अन्य भारतीय हथियार प्रणालियों में कई देशों की रुचि लगातार बढ़ रही है। आर्मेनिया के साथ संभावित यह बड़ा रक्षा समझौता भारत की रक्षा कूटनीति को नई मजबूती दे सकता है। इससे न केवल भारत का रक्षा निर्यात बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों में भारत का प्रभाव भी मजबूत होगा।  आने वाले वर्षों में भारत केवल एक बड़ा रक्षा आयातक देश नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के प्रमुख रक्षा निर्यातकों में भी अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।
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