भारतीय टीम का अटपटा फैसला : वॉर्मअप मैच में दिनभर फील्डिंग करते रहे आकिब नबी, नहीं मिला एक भी ओवर
श्रीलंका दौरे से पहले खेले जा रहे वॉर्मअप मुकाबले में भारतीय टीम मैनेजमेंट के एक फैसले ने सबको हैरान कर दिया। जसप्रीत बुमराह के बैकअप के तौर पर टीम में शामिल युवा तेज गेंदबाज आकिब नबी को पूरे पहले दिन गेंदबाजी का मौका नहीं दिया गया। जबकि टीम ने कई गेंदबाजों को आजमाया, नबी पूरे 90 ओवर सिर्फ फील्डिंग करते नजर आए।
श्रीलंका दौरे की शुरुआत से ठीक पहले खेले जा रहे वॉर्मअप मुकाबले के पहले दिन भारतीय टीम मैनेजमेंट का एक फैसला समझ से परे नजर आया। श्रीलंका क्रिकेट 11 ने दिन का खेल खत्म होने तक 90 ओवरों में 8 विकेट खोकर 363 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा कर दिया। इस दौरान भारतीय कप्तान और मैनेजमेंट ने प्लेइंग इलेवन में शामिल लगभग हर गेंदबाज को आजमाया, लेकिन सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि जसप्रीत बुमराह के विकल्प के तौर पर टीम से जुड़े तेज गेंदबाज आकिब नबी को पूरे दिन एक भी ओवर फेंकने का मौका नहीं दिया गया।
टीम को मिलता खिलाड़ी को परखने का मौका
किसी भी विदेशी दौरे पर अभ्यास मैच का मुख्य मकसद खिलाड़ियों को वहां के मौसम, नमी और पिच के मिजाज में ढलने का मौका देना होता है। पहली बार भारतीय ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बने जम्मू-कश्मीर के युवा पेसर आकिब नबी के लिए यह मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा था। अगर मैनेजमेंट उन्हें 4-5 ओवर का एक छोटा स्पेल भी थमाता, तो नबी न केवल श्रीलंकाई पिचों पर अपनी लाइन-लेंथ का अंदाजा लगा पाते, बल्कि टीम को भी उनकी धार परखने का मौका मिलता।
90 ओवर तक सिर्फ फील्डिंग
फैसले पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि भारत ने कुलदीप यादव, रविंद्र जडेजा, मानव सुतार और सारांश जैन जैसे स्पिनर्स से लगातार लंबे स्पेल करवाए। वहीं तेज गेंदबाजी में मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बरार को भी आजमाया गया। वॉर्मअप मैचों में बॉलिंग रोटेशन के नियम बेहद लचीले होते हैं, इसके बावजूद आकिब नबी को पूरे 90 ओवर सिर्फ बाउंड्री लाइन पर फील्डिंग तक सीमित रखना किसी के गले नहीं उतर रहा। अगर आगामी टेस्ट सीरीज के दौरान भारत का कोई मुख्य तेज गेंदबाज अनफिट या चोटिल होता है, तो नबी को सीधे प्लेइंग इलेवन में उतरना पड़ सकता है। पहले दिन कुछ खास प्रभाव नहीं
ऐसे में बिना किसी मैच प्रैक्टिस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सीधे उतरना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी चुनौती होगा। हैरानी की बात यह भी रही कि पहले दिन भारत के फ्रंटलाइन पेसर्स कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ सके। प्रसिद्ध कृष्णा ने बिना कोई सफलता हासिल किए 8 ओवरों में 32 रन लुटा दिए, जबकि मोहम्मद सिराज भी संघर्ष करते नजर आए। जब मुख्य गेंदबाज रन रोक नहीं पा रहे थे, तब नबी को आजमाना एक बेहतर और व्यावहारिक रणनीति हो सकती थी।
आकिब नबी का भारतीय टीम में चयन उनके रणजी ट्रॉफी के दो जादुई सीजनों का इनाम है, जहां उन्होंने अपनी स्विंग और रफ्तार से बल्लेबाजों की नाक में दम कर रखा था।
2024-25 सीजन: 13.93 के शानदार औसत से 44 विकेट चटकाए और टूर्नामेंट के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज बने।
2025-26 सीजन: अपने प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए महज 12.65 की औसत से 60 विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने 7 बार पारी में 5 या उससे ज्यादा विकेट लेने का कारनामा किया।
बाकी बचे मैच में मिलता है या नहीं मौक
इसी धमाकेदार प्रदर्शन के दम पर नबी ने जम्मू-कश्मीर को इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जिताया था। अब देखना यह होगा कि वॉर्मअप मैच के बाकी बचे दिनों में मैनेजमेंट इस युवा गेंदबाज को गेंद थमाता है या नहीं।