Jheeram Attack: 25 मई 2013 का दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में एक ऐसी त्रासदी के रूप में दर्ज है, जिसे लोग आज भी नहीं भूल पाए हैं। बस्तर की झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले को निशाना बनाया गया था। इस हमले में प्रदेश के कई बड़े नेताओं समेत 32 लोगों की जान चली गई थी।
करीब 13 साल बाद इस मामले में बुधवार (16 सितंबर) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत सजा का ऐलान कर सकती है। विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने 5 सितंबर को मामले में 10 माओवादियों को दोषी करार दिया था। अब अदालत यह तय करेगी कि दोषियों को उम्रकैद मिलेगी या फिर कानून के तहत कोई और सख्त सजा दी जाएगी। सभी दोषी फिलहाल जगदलपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं और अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
11 आरोपियों पर चला मुकदमा, अब 10 दोषियों को मिलेगी सजा
झीरम घाटी हमले के मामले में कुल 11 नक्सलियों को आरोपी बनाया गया था। सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई। इसके बाद अदालत में 10 आरोपियों के खिलाफ केस जारी रहा। दोषी ठहराए गए आरोपियों में प्रमिला मोडियाम, सुमित्रा पुनेम, मुक्का मांडवी, मड़कामी देवा, कोसा कवासी, आयत मरकाम, बंजामी सेना, चैतू लेकाम, जोगा मड़कामी और महादेव नागा शामिल हैं। NIA ने इस मामले में साल 2015 में करीब एक हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। जांच एजेंसी की ओर से अदालत में 101 गवाहों के बयान भी दर्ज कराए गए। 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला जगदलपुर से करीब 42 किलोमीटर दूर झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान घात लगाए बैठे माओवादियों ने काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की हत्या कर दी गई। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और पूर्व विधायक उदय मुदलियार प्रमुख थे। हमले में कई सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग घायल भी हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था।
दोषियों को मिल सकती है उम्रकैद या फांसी तक की सजा
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जिन गंभीर धाराओं में आरोपियों को दोषी पाया गया है, उनमें सजा के कड़े प्रावधान हैं। इन धाराओं में अदालत उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक की सजा सुना सकती है। अब सबकी नजरें NIA की विशेष अदालत के अंतिम फैसले पर हैं। झीरम घाटी मामले में दोषसिद्धि के बाद छत्तीसगढ़ में राजनीतिक बयान भी तेज हो गए हैं। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में मामले की जांच को लेकर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA जांच पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जांच में वास्तविक साजिशकर्ताओं तक पहुंचने में कमी रही है। हालांकि इन आरोपों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने पक्ष हैं।झीरम घाटी में शहीद हुए प्रमुख नेता
महेंद्र कर्मा
महेंद्र कर्मा छत्तीसगढ़ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके थे। बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान सलवा जुडूम से भी उनका नाम जुड़ा था। झीरम घाटी हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी।
नंद कुमार पटेल
नंद कुमार पटेल उस समय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे। वे राज्य सरकार में मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके थे। हमले के दौरान उन्हें उनके बेटे दिनेश पटेल के साथ अगवा किया गया था, बाद में दोनों की हत्या कर दी गई।
विद्याचरण शुक्ल
विद्याचरण शुक्ल राष्ट्रीय राजनीति के बड़े नेताओं में शामिल थे और कई बार केंद्रीय मंत्री रहे। झीरम हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उपचार के दौरान उनका निधन हुआ।
उदय मुदलियार
उदय मुदलियार राजनांदगांव से विधायक रह चुके थे और कांग्रेस संगठन में सक्रिय भूमिका निभाते थे। झीरम हमले में उनकी भी हत्या कर दी गई।
योगेंद्र शर्मा
योगेंद्र शर्मा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे। वे परिवर्तन यात्रा के काफिले में शामिल थे और हमले में उनकी जान चली गई।
झीरम घाटी हमले में जान गंवाने वाले लोग
- नंद कुमार पटेल – तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
- दिनेश पटेल – नंद कुमार पटेल के पुत्र
- महेंद्र कर्मा – पूर्व नेता प्रतिपक्ष
- उदय मुदलियार – पूर्व विधायक
- विद्याचरण शुक्ल – पूर्व केंद्रीय मंत्री
- योगेंद्र शर्मा – कांग्रेस नेता
- गोपीचंद माधवानी – कांग्रेस नेता
- राजेश चंद्राकर – कांग्रेस कार्यकर्ता
- मनोज जोशी – कांग्रेस कार्यकर्ता
- अभिषेक गोलछा – कांग्रेस कार्यकर्ता
- गणपत नाग – कांग्रेस कार्यकर्ता
- अल्लाहनूर – कांग्रेस कार्यकर्ता
- सदाशिव नाग – स्थानीय कार्यकर्ता
- भागीरथी – स्थानीय कार्यकर्ता
- राजकुमार – कार्यकर्ता
- चंदर माझी – कार्यकर्ता
- प्रहलाद मांझी – कार्यकर्ता
- मुकेश कर्मा – परिवार से संबंधित सदस्य
- इमानुएल केरकेट्टा – पुलिस अधिकारी
- पात्रिक खलखो समेत कई सुरक्षाकर्मी
झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक माना जाता है। अब अदालत के फैसले के साथ लंबे समय से चले आ रहे इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव पूरा होने जा रहा है।

