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समग्र शिक्षा के व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने नौकरी और वेतन को लेकर उठाई मांग
समग्र शिक्षा के व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने नौकरी और वेतन को लेकर उठाई मांग
रायपुर

नौकरी पर संकट : समग्र शिक्षा में प्रशिक्षकों की चिंता, नई एजेंसी से नौकरी जाने का डर

समग्र शिक्षा योजना के तहत कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने री-टेंडरिंग प्रक्रिया के कारण नौकरी पर संकट और दो महीने के लंबित वेतन का मुद्दा उठाया है। प्रशिक्षकों ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात कर हस्तक्षेप की मांग की। वहीं समग्र शिक्षा आयुक्त किरण कौशल ने कहा कि वे निजी एजेंसी के कर्मचारी हैं, लेकिन वेतन संबंधी शिकायतों की जांच कराई जाएगी और पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए एक्सटेंशन का प्रस्ताव भेजा गया है।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
27 Jul 2026, 03:55 PM
रायपुर
समग्र शिक्षा योजना के तहत छत्तीसगढ़ में वर्ष 2014-15 से व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस योजना में लंबे समय से कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने नए शैक्षणिक सत्र में शुरू हुई री-टेंडरिंग प्रक्रिया पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि प्रशिक्षण प्रदाता (वीटीपी) बदलता है तो वर्षों से सेवा दे रहे प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है। इसके साथ ही पिछले शैक्षणिक सत्र के दो महीने का वेतन भी अब तक नहीं मिलने का आरोप लगाया गया है। 
अपनी मांगों को लेकर प्रशिक्षकों ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया। समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप करने और उनकी आवाज सरकार तक पहुंचाने की मांग की। 

शिक्षकों का आरोप, एक्सटेंशन का आश्वासन नहीं निभाया गया

व्यावसायिक प्रशिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई वर्षों से ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के विद्यार्थियों को कौशल आधारित शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले मौखिक रूप से सेवा अवधि बढ़ाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब उन्हें हटाने की स्थिति बन गई है। उनका कहना है कि इससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।प्रशिक्षकों के अनुसार निजी एजेंसी की ओर से पिछले सत्र के दो महीने का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है। वहीं कई स्कूलों के प्राचार्य उन्हें नियमित रूप से पढ़ाने के लिए बुला रहे हैं, लेकिन एजेंसी की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। उनका दावा है कि एजेंसी ने स्कूल जाना या न जाना उनकी इच्छा पर छोड़ दिया है, लेकिन इस अवधि का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा।

समग्र शिक्षा कार्यालय से नहीं मिला स्पष्ट जवाब

प्रशिक्षकों का कहना है कि वे कई बार समग्र शिक्षा कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। इससे उनके भविष्य को लेकर असमंजस और बढ़ गया है। प्रशिक्षकों ने अपनी समस्याओं की सूची भी साझा की है। उनका कहना है कि री-टेंडरिंग के कारण नौकरी जाने का खतरा बना हुआ है। करीब 10 वर्षों से कार्यरत 121 प्रशिक्षकों का मानदेय 23 हजार रुपये से घटाकर 20 हजार रुपये कर दिया गया। इसके अलावा नए और स्थानांतरित किए गए 121 प्रशिक्षकों को मई और जून का वेतन भी नहीं मिला, जबकि उनका दावा है कि इस दौरान उन्होंने विभागीय कार्य किए। प्रशिक्षकों का यह भी कहना है कि पीएबी रिपोर्ट में 23 हजार रुपये मानदेय स्वीकृत होने के बावजूद उसका लाभ नहीं दिया जा रहा है और पूर्व में घोषित मानदेय वृद्धि भी लागू नहीं की गई। 

प्रशिक्षकों की प्रमुख मांगें

व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने मांग की है कि वीटीपी बदलने के बाद भी वर्तमान सभी प्रशिक्षकों की सेवाएं जारी रखी जाएं। साथ ही मई और जून का लंबित वेतन तत्काल जारी किया जाए। उन्होंने 121 प्रशिक्षकों का 23 हजार रुपये मासिक मानदेय बहाल करने, पीएबी के अनुसार स्वीकृत सभी लाभ देने और भविष्य में सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की भी मांग की है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने प्रशिक्षकों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार नई नौकरियां देने में असफल रही है और अब जिनके पास रोजगार है, उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ रही है। उन्होंने कहा कि एनएसयूआई पहले ही इस मुद्दे को लेकर समग्र शिक्षा कार्यालय का घेराव कर चुकी है, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो शिक्षकों और छात्रों के हित में आंदोलन किया जाएगा। 

समग्र शिक्षा आयुक्त ने दिया जवाब

समग्र शिक्षा की आयुक्त किरण कौशल ने कहा कि संबंधित प्रशिक्षक सीधे समग्र शिक्षा के कर्मचारी नहीं हैं। उनकी नियुक्ति निजी एजेंसी के माध्यम से केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए की गई थी और यह शर्त पहले से स्पष्ट थी। उन्होंने बताया कि यदि किसी एजेंसी ने वेतन रोका है तो उसकी जांच कर बकाया भुगतान कराया जाएगा। आयुक्त ने यह भी बताया कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षकों के एक्सटेंशन का प्रस्ताव शिक्षा विभाग को भेजा गया है। साथ ही नया टेंडर जारी किया जा चुका है और नई एजेंसी आवश्यकता होने पर वर्तमान प्रशिक्षकों को दोबारा नियुक्त करने का निर्णय ले सकती है।
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