जल संरक्षण से आत्मनिर्भर बना कालामांजल, 250 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
सूरजपुर जिले के कालामांजल गांव में जल संरक्षण कार्यों से बड़ा बदलाव आया है। कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम के निर्माण से बारिश का पानी सहेजा गया, जल स्रोत सालभर उपलब्ध हुए और खेती, मत्स्य पालन व ग्रामीण रोजगार के नए अवसर बढ़े।
कीर्तिमान डेस्क
05 Aug 2026, 06:13 PM
रायपुर
छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनभागीदारी और ग्रामीण विकास से जोड़कर लागू की जा रही विकसित भारत जी-राम-जी योजना दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला रही है। सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड के ग्राम पंचायत कालामांजल की सफलता इसका प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।
कालामांजल में पहले बारिश का अधिकांश पानी बह जाता था और गर्मी आते-आते जल स्रोत सूखने लगते थे। पेयजल, मवेशियों के लिए पानी और खेती-किसानी जैसी जरूरतों के लिए ग्रामीणों को लंबे समय तक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पानी की कमी गांव की सबसे बड़ी समस्या बनी हुई थी।
सरकार की पहल से शुरू हुआ जल संरक्षण
अभियान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जल संरक्षण को ग्रामीण समृद्धि का अहम आधार माना है। इसी दिशा में जिला प्रशासन द्वारा कालामांजल में बड़े जल संरक्षण की मिसाल बना कालामांजलस्तर पर कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम का निर्माण कराया गया। कंटूर ट्रेंच और गेबियन चेक डैम ने बारिश के पानी को रोकने और जमीन के अंदर पहुंचाने का काम किया। इससे मिट्टी का कटाव कम हुआ और जंगल से आने वाला कचरा भी जल स्रोतों तक पहुंचने से पहले रुकने लगा। परिणामस्वरूप जल स्रोत अधिक सुरक्षित और स्वच्छ बने।
रोजगार के साथ बढ़ी खुशहाली
ग्राम निवासी मनोहर सिंह ने बताया कि पहले गर्मी में पानी की तलाश ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती होती थी। मवेशियों को पानी पिलाने और खेती करने में भी परेशानी आती थी। अब जल स्रोत पूरे साल उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग पेयजल, स्नान, कपड़े धोने, मवेशियों के लिए पानी और मत्स्य पालन जैसे कार्यों में किया जा रहा है। ग्राम पंचायत के सरपंच अर्जुन सिंह के अनुसार, इस योजना से केवल जल संरक्षण ही नहीं हुआ, बल्कि 250 से अधिक श्रमिकों को रोजगार भी मिला। निर्माण कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।
खेती और आजीविका के नए अवसर बढ़े
जल स्रोतों के समृद्ध होने से गांव में खेती की संभावनाएं बढ़ी हैं। मवेशियों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है और मत्स्य पालन जैसी अतिरिक्त आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है। ग्रामीण अब भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त नजर आ रहे हैं। ग्रामीणों ने जल संरक्षण के इस बदलाव के लिए राज्य शासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। अब कालामांजल गांव हर मौसम में पानी की उपलब्धता के साथ विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।