कारगिल विजय दिवस के अवसर पर गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, रीवा (लखौली) में श्रद्धा, सम्मान और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय की प्रार्थना सभा के दौरान पूरा परिसर देशभक्ति के रंग में रंग गया। भारतीय सेना की वर्दी एवं सैनिक वेशभूषा में सजे नन्हें विद्यार्थियों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से कारगिल युद्ध की शौर्य गाथा को सजीव कर दिया।
कार्यक्रम ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के मन में देश के वीर सैनिकों के प्रति गर्व, सम्मान और कृतज्ञता की भावना को और प्रगाढ़ किया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद कारगिल युद्ध के अमर शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विद्यार्थियों ने भारत माता एवं वीर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उनके अद्वितीय बलिदान को नमन किया।
प्रधान पाठक ने बताया कारगिल विजय दिवस का महत्व
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के प्रधान पाठक खान सर ने विद्यार्थियों को कारगिल विजय दिवस के ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में युद्ध हुआ था। अत्यंत विषम पर्वतीय परिस्थितियों में भारतीय सेना के वीर जवानों ने अद्वितीय साहस और रणकौशल का परिचय देते हुए दुश्मन के कब्जे वाले सभी रणनीतिक शिखरों को पुनः अपने नियंत्रण में लिया। 26 जुलाई 1999 को भारत ने इस युद्ध में ऐतिहासिक विजय प्राप्त की, जिसकी स्मृति में प्रतिवर्ष 26 जुलाई को पूरे देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है।वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को किया नमन
खान सर ने कहा कि कारगिल विजय दिवस उन वीर सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान को स्मरण करने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उन्होंने विद्यार्थियों से वीर सैनिकों के त्याग और समर्पण से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। प्रधान पाठक ने विद्यार्थियों से अपने जीवन में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रसेवा और देशप्रेम जैसे मूल्यों को अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक छात्र को वीर सैनिकों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए।