Karnataka Valmiki Corporation Scam: एक ही घोटाले के साये में दूसरी बार मंत्री पद गंवाने को मजबूर हुए बी नागेंद्र, इस्तीफा देते वक्त झलका दर्द
Karnataka Valmiki Corporation Scam: 187 करोड़ रुपये के घोटाले के बीच बी नागेंद्र ने दोबारा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। विपक्ष के दबाव के बाद उन्होंने नैतिक आधार पर पद छोड़ने का फैसला किया।
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कीर्तिमान न्यूज
29 Aug 2026, 12:20 PM
बेंगलुरु
Karnataka Valmiki Corporation Scam: कर्नाटक की राजनीति में वित्तीय अनियमितता का एक मामला लगातार गर्माता जा रहा है। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में हुए कथित करोड़ों रुपये के घोटाले की आंच में एक बार फिर पूर्व मंत्री बी नागेंद्र झुलस गए हैं। मात्र 25 दिन पहले ही नए सिरे से मंत्री पद की शपथ लेने वाले नागेंद्र ने आखिरकार अपने पद से दोबारा इस्तीफे का ऐलान कर दिया है। विपक्ष के भारी दबाव और नैतिक आधार की दुहाई देते हुए उन्होंने अपना पद छोड़ दिया। इस्तीफे का औपचारिक ऐलान करते हुए बी नागेंद्र मीडिया के सामने काफी भावुक नजर आए।
निराधार आरोप से पार्टी की छवि पर पड़ा था असर
खुद को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष राजनीतिक द्वेष के चलते उन्हें बेवजह निशाना बना रहा है। नागेंद्र ने सफाई देते हुए कहा, "विपक्ष जिस तरह के अनर्गल और निराधार आरोप लगा रहा है, उससे मेरी पार्टी की छवि पर असर पड़ रहा था। मैं नहीं चाहता कि मेरी वजह से संगठन को किसी तरह की शर्मिंदगी का सामना करना पड़े। इसीलिए मैंने अपनी इच्छा से इस्तीफा देने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 'मनुवादी सोच' रखने वाले लोग कभी नहीं चाहते थे कि कोई आदिवासी नेता राजनीति में आगे बढ़े और समाज का प्रतिनिधित्व करे।
इस्तीफे के बाद झलका दर्दपहले भी एक बार देना पड़ा था इस्तीफा
यह पहला मौका नहीं है जब नागेंद्र को इस घोटाले की वजह से अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी हो। इससे पहले जून 2024 में भी सिद्धारमैया सरकार के दौरान, जब वह जनजातीय कल्याण विभाग का प्रभार संभाल रहे थे, तब इसी मामले में उन्हें पहली बार मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। हालिया राजनीतिक उलटफेर के बाद जब डीके शिवकुमार के नेतृत्व और नए मंत्रिमंडल का गठन हुआ, तो नागेंद्र को एक बार फिर से सरकार में शामिल कर लिया गया।
कांग्रेस सरकार के गठन के बाद मिला था विभाग
हालांकि, उनके दोबारा मंत्री बनते ही विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और आरोपी नेता को कैबिनेट में बनाए रखने पर तीखा विरोध दर्ज कराया। विपक्ष के इसी चौतरफा दबाव के आगे आखिरकार सरकार और नागेंद्र दोनों को झुकना पड़ा। मामले की जड़ें साल 2023 से जुड़ी हैं, जब राज्य में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद बी नागेंद्र को अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग सौंपा गया था। इसी विभाग के अंतर्गत 'कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम' आता है।
अकाउंट्स ऑफिसर ने की थी आत्महत्या
आरोप है कि निगम के आधिकारिक बैंक खाते से लगभग 187 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को बिना किसी पूर्व अनुमति के फर्जी तरीके से अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया था। इस घोटाले की भनक तब लगी जब निगम के अकाउंट्स ऑफिसर चंद्रशेखर पी. ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली। चंद्रशेखर ने अपने सुसाइड नोट में पैसों के इस हेरफेर का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोला था और उच्च अधिकारियों के दबाव की बात कही थी।
इस्तीफे के बाद कर्नाटक सियासत में हलचल
सुसाइड नोट सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया, जिसके बाद से ही नागेंद्र लगातार जांच एजेंसियों और विपक्ष के निशाने पर हैं। फिलहाल नागेंद्र के इस्तीफे के बाद कर्नाटक की सियासत में हलचल तेज हो गई है, और देखना यह होगा कि जांच की आंच आगे किस-किस तक पहुंचती है।