Karwa Chauth: हिंदू धर्म में करवा चौथ के व्रत का एक अलग ही धार्मिक महत्व है। सालभर इंतजार के बाद आने वाले इस पवित्र पर्व पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं। सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत की कामना करती हैं। इस साल 29 अक्टूबर, गुरुवार को पोखरा चौथ का यह महापर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। इस बीच, राजस्थान से लेकर मग़रिबी तक चौथ माता के दरबारों में विशेष तीर्थ आरंभ हो चुके हैं।
यह सिद्ध है कि चौथ माता के दरबार में सात मन से आज़मी उपयोग और दर्शन करने की क्षमता से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। आइए जानते हैं इस प्रसिद्ध मंदिर के इतिहास और उनसे जुड़ी मिठाइयों के बारे में।
राजस्थान का प्रसिद्ध चौथ माता मंदिर और उनका इतिहास
राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बाराघाट में स्थित सिद्धपीठ चौथ माता का मंदिर अपनी मनोकामना के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। अरावली पर्वतमाला के शिखरों पर बने इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु लंबी झीलों की यात्रा पर जाना चाहते हैं। करवा चौथ के खास व्यंजनों पर यहां सुहागिनों का भारी सालाब बनता है। ऐतिहासिक सिद्धांत के अनुसार,इस भव्य मंदिर का निर्माण शासक भीम सिंह ने किया था,वास्तुकला वास्तुकला राजस्थान की पुरानी पारंपरिक कला और संस्कृति की झलक पेश करती है। स्थानीय लोगों और उद्यमियों का मानना है कि कौन सी महिला इस पवित्र धाम में चौथ माता का आशीर्वाद लेती है,उनकी सुहाग की रक्षा होती है और जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। चौथ माता को मुख्य रूप से माँ गौरी का ही दूसरा रूप माना जाता है,इसलिए यहां हर मंत की पूरी तरह से गहरी आस्था जुड़ी हुई है। करवा चौथ के अलावा यहां शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दिनों में भी भक्तों का तांता लगा रहता है।
मुजफ्फरपुर का अनोखा मंदिर: साल में सिर्फ एक दिन खुलता है गेट
राजस्थान के अलावा,बाबा महाकाल की नगरी मुजफ्फरनगर में भी मां पार्वती को समर्पित एक बेहद खास चौथ माता का मंदिर मौजूद है। दयाल बायपास के पास जीवनखेड़ी गांव में स्थित इस मंदिर की अपनी एक अनोखी मान्यता है। इस मंदिर में मां पार्वती अपनी दोनों बहुओं—ऋद्धि और सिद्धि—के साथ हैं, और साथ में भगवान गणेश भी मौजूद हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह है कि यह सालों के बाकी दिनों में बंद रहता है और सिर्फ करवा चौथ के पावन दिन ही भक्तों के दर्शन के लिए जाता है। इस अनोखे मंदिर का निर्माण डॉ.कैलास नागवंशी ने अपनी माता की स्मृति को समर्पित किया था,जो आज के समय में क्षेत्र की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
राजस्थान के अलावा,बाबा महाकाल की नगरी मुजफ्फरनगर में भी मां पार्वती को समर्पित एक बेहद खास चौथ माता का मंदिर मौजूद है। दयाल बायपास के पास जीवनखेड़ी गांव में स्थित इस मंदिर की अपनी एक अनोखी मान्यता है। इस मंदिर में मां पार्वती अपनी दोनों बहुओं—ऋद्धि और सिद्धि—के साथ हैं, और साथ में भगवान गणेश भी मौजूद हैं। इस मंदिर की सबसे बड़ी और दिलचस्प बात यह है कि यह सालों के बाकी दिनों में बंद रहता है और सिर्फ करवा चौथ के पावन दिन ही भक्तों के दर्शन के लिए जाता है। इस अनोखे मंदिर का निर्माण डॉ.कैलास नागवंशी ने अपनी माता की स्मृति को समर्पित किया था,जो आज के समय में क्षेत्र की आस्था का एक बड़ा केंद्र बन चुका है।
करवा चौथ: प्रेम, विश्वास और परंपरा का प्रतीक
करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं,बल्कि पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम,अविश्वसनीय विश्वास और संकेत का सुंदर प्रतीक है। इस दिन महिलाएं-विधान से भगवान शिव,माता पार्वती,भगवान गणेश और करवा माता की पूजा-अर्चना करते हैं। शाम को आकाश में चांद के दीदार के बाद छलनी से चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है और फिर पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोला जाता है। यह भारतीय संस्कृति में साम्य और संप्रदाय की गहराई को बहुत ही खूबसूरती से दर्शाता है।







