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Significance of Lakshmi Footprints (Image Source: AI Generated)
Significance of Lakshmi Footprints (Image Source: AI Generated)
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Diwali Vastu Tips: मुख्य द्वार पर क्यों बनाए जाते हैं शुभ-लाभ और मां लक्ष्मी के चरण, सिर्फ सजावट नहीं, छिपा है गहरा संदेश

Diwali Vastu Tips: दीपावली पर मुख्य द्वार पर मां लक्ष्मी के चरण चिह्न बनाना सुख-समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। जानें इन पदचिह्नों का धार्मिक महत्व, सही दिशा और घर के प्रवेश द्वार को सजाने से जुड़े जरूरी वास्तु नियम।

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प्रकाशित: 26 Oct 2026, 06:44 PM · अपडेट: 27 Oct 2026, 10:24 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Diwali Vastu Tips: रोशनी और उल्लास का महापर्व दीपावली इस साल 8 नवंबर 2026 को धूमधाम से मनाया जाएगा। त्योहार के आने से पहले ही घरों की रंगाई-पुताई, साफ-सफाई और सजावट का दौर शुरू हो जाता है। इस पावन अवसर पर घरों के मुख्य द्वार को सजाने की परंपरा सदियों पुरानी है। लोग दरवाजे पर लक्ष्मी जी के चरण चिह्न (पदचिह्न) के स्टीकर लगाते हैं या फिर चावल के आटे, सिंदूर व रंगों से खूबसूरत रंगोली बनाते हैं। आइए जानते हैं कि मुख्य द्वार पर इन चिह्नों को बनाने का असली धार्मिक महत्व क्या है और इससे जुड़े वास्तु के जरूरी नियम क्या कहते हैं।

वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार की भूमिका 

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि यह बाहरी दुनिया और आपके घर के भीतर की ऊर्जा के बीच का मुख्य द्वार है।
  • घर में किस तरह की ऊर्जा प्रवेश करेगी, यह मुख्य द्वार की साफ-सफाई और व्यवस्था पर निर्भर करता है। दिशाओं के नियमों से भी ज्यादा जरूरी यह है कि आपका मुख्य दरवाजा पूरी तरह साफ और व्यवस्थित हो। 
  • दरवाजे का बिना किसी कर्कश आवाज के सहजता से खुलना और बंद होना भी शुभता का संकेत माना जाता है। एक साफ और रोशनी से जगमगाता प्रवेश द्वार मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए सबसे अनुकूल माहौल तैयार करता है।

चरण चिह्न लगाने का धार्मिक महत्व 

मुख्य द्वार पर जब भी लक्ष्मी जी के चरण चिह्न बनाए जाते हैं, तो इस बात का खास ख्याल रखा जाता है कि पैरों की दिशा हमेशा घर के अंदर की तरफ आती हुई दिखाई दे। यह इस बात को दर्शाता है कि मां लक्ष्मी बाहर से चलकर आपके घर के भीतर प्रवेश कर रही हैं। ऐसी मान्यता है कि जिस घर के मुख्य द्वार पर श्रद्धा के साथ ये पदचिह्न उकेरे जाते हैं, वहां से दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है तथा परिवार में सुख-वैभव और शांति का स्थायी वास बनता है।

मुख्य द्वार सजाते समय ध्यान रखने योग्य 4 जरूरी बातें

दीवाली की तैयारियों के बीच मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए इन पारंपरिक और वास्तु नियमों का पालन जरूर करें:
  • चरण चिह्न बनाने से ठीक पहले मुख्य द्वार और उसके आसपास की जमीन को अच्छी तरह धो लें या गीले कपड़े से पोंछकर स्वच्छ कर लें।
  • दरवाजे के आसपास पड़ी फालतू या टूटी-फूटी चीजों (जैसे पुराने जूते-चप्पल, टूटे हुए गमले या कूड़ेदान) को तुरंत हटा दें, क्योंकि इन्हें अशुभ माना जाता है।
  • द्वार पूरी तरह साफ होने के बाद ही मां लक्ष्मी के चरण चिह्न लगाएं। इसके साथ ही दरवाजे पर ताजे फूलों का तोरण (बंधनवार) लगाएं, पारंपरिक रंगोली सजाएं और दोनों तरफ घी या तेल के दीपक जलाएं।
  • पदचिह्नों को हमेशा ऐसी जगह बनाएं जहां परिवार के सदस्यों या बाहर से आने वाले मेहमानों के पैर सीधे उन पर न पड़ें, ताकि देवी के इन प्रतीकों का पूरा सम्मान और पवित्रता बनी रहे।
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