खाद वितरण के नियम बदले : किसानों को 50% अतिरिक्त खाद की छूट, टैगिंग व्यवस्था खत्म
मध्य प्रदेश सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। किसानों को अब यूरिया या डीएपी के साथ दूसरी खाद खरीदने की मजबूरी नहीं होगी। किसान निर्धारित कोटे से दो चरणों में 50 प्रतिशत तक अतिरिक्त खाद ले सकेंगे। ई-विकास 2.0 के तहत टोकन जारी होने के 24 घंटे के भीतर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। WhatsApp Bot के जरिए भी टोकन बुकिंग की सुविधा शुरू की जा रही है।
मध्य प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। खाद वितरण की पुरानी और पेचीदा व्यवस्था को बदलते हुए राज्य सरकार ने नियमों में बड़ा सुधार किया है। अब प्रदेश का कोई भी किसान अपनी जरूरत के हिसाब से यूरिया या डीएपी खरीद सकेगा। सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि अब एक खाद खरीदने पर दूसरी खाद साथ में लेने की मजबूरी (टैगिंग) पूरी तरह खत्म कर दी गई है। इसके अलावा, तय कोटे से 50 फीसदी तक ज्यादा खाद लेने की छूट भी दी जा रही है। ई-विकास प्रणाली 2.0 के तहत लागू किए गए इन नए नियमों में किसानों को अतिरिक्त खाद के लिए अब किसी अधिकारी के सामने वजह साबित नहीं करनी पड़ेगी।
पहली बार में 25% ज्यादा खाद, कारण बताने की झंझट खत्म
पहली बार में: किसान अपने निर्धारित कोटे से 25 प्रतिशत तक ज्यादा खाद तुरंत खरीद सकेंगे।
दूसरी बार में: अगर और जरूरत पड़ती है, तो 7 दिन बाद फिर से 25 प्रतिशत अतिरिक्त खाद उठाई जा सकेगी।
24 घंटे में टोकन और WhatsApp से बुकिंग
- 24 घंटे की समयसीमा: ई-विकास 2.0 पोर्टल पर टोकन जनरेट होने के बाद 24 घंटे के भीतर किसान को खाद उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया है। मार्कफेड के डबल लॉक सेंटरों में मौजूद स्टॉक के आधार पर ही ये टोकन जारी होंगे।
WhatsApp से बुकिंग: 21-22 अगस्त से किसान अपने मोबाइल पर WhatsApp Bot के जरिए भी टोकन जनरेट कर सकेंगे। टोकन बनते ही SMS पर दुकान का नाम, खाद की मात्रा, उठाने की तारीख और टोकन की वैलिडिटी की पूरी जानकारी मिल जाएगी।
राज्यव्यापी अभियान शुरू
यदि किसी किसान की फसल खराब होती है या अचानक ज्यादा खाद की आवश्यकता पड़ती है, तो वे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऐसे मामलों में तहसीलदार या एसडीएम (SDM) स्तर से 48 घंटे के भीतर मंजूरी देना अनिवार्य किया गया है, ताकि संकट के समय किसान को बिना देरी के खाद मिल सके। किसानों की 'Farmer ID' बनाने, अग्रिम खाद उठान और पैक्स (PACS) की सदस्यता दिलाने के लिए 20 अगस्त 2026 से राज्यव्यापी अभियान शुरू कर दिया गया है।
डीलरों के पास पर्याप्त स्टॉक
सहकारी समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे POS मशीनों के जरिए वितरण को आसान बनाएं। कृषि विभाग का कहना है कि प्रदेश की सहकारी समितियों, एमपी एग्रो और प्राइवेट डीलरों के पास खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। गौरतलब है कि हाल ही में भोपाल में खाद की किल्लत और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद सरकार ने यह कदम उठाया है।