Child Health: रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड में बच्चों में कुपोषण की समस्या स्वास्थ्य विभाग के लिए अब भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। पहाड़ी और वन क्षेत्रों में बसे गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच के कारण कई परिवार बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं। इसका असर धरमजयगढ़ के सिविल अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वाले बच्चों की संख्या पर भी दिखाई दे रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का अभाव भी कुपोषण की समस्या को बढ़ा रहा है।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं के खान-पान और स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, जिसका सीधा असर नवजात और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। खंड चिकित्सा अधिकारी गजानंद राठिया ने कुपोषित बच्चों के उपचार और उनकी नियमित निगरानी को लेकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग का जोर समय पर पहचान, उपचार और पोषण उपलब्ध कराने पर है।
माताओं के पोषण पर भी ध्यान जरूरी
जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवारों में महिलाएं दिनभर घरेलू कामकाज और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रहती हैं। ऐसे में उनके खान-पान में पर्याप्त पोषक तत्व शामिल नहीं हो पाते। चिकित्सकों का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के बाद मां का पोषण बेहतर रखना बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए बेहद जरूरी है। कुपोषित बच्चों के उपचार के लिए शासन की ओर से पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां बच्चों को चिकित्सकीय देखरेख के साथ आवश्यक पोषण दिया जाता है। उपचार के दौरान उनकी माताओं को भी केंद्र में रहने की सुविधा मिलती है।240 बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य
धरमजयगढ़ के पोषण पुनर्वास केंद्र को इस वर्ष 240 कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने का लक्ष्य दिया गया है। वर्ष 2004 से संचालित इस केंद्र में दूर-दराज के क्षेत्रों से महिलाएं अपने बच्चों को लेकर पहुंच रही हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बच्चों को नियमित उपचार और पोषण देने से उनकी स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है। खंड चिकित्सा अधिकारी गजानंद राठिया के निर्देश और डॉ. भगत की निगरानी में बच्चों के उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपचार के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर कई बच्चों को स्वस्थ अवस्था में उनके घर भेजा जा रहा है।
