पांच राज्यों में फैला पुलिस का जाल
वारदात को अंजाम देने के बाद से फरार चल रहे केयरटेकर वरुण की धरपकड़ के लिए भोपाल पुलिस एक्शन मोड में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए क्राइम ब्रांच की 11 टीमों और भोपाल पुलिस जोन-1 की 4 टीमों को मैदान में उतारा गया है। पुलिस की अलग-अलग टीमें पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और मध्य प्रदेश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। हालांकि, शातिर आरोपी अपना मोबाइल बंद कर चुका है, जिससे उसकी सटीक लोकेशन ट्रेस करने में दिक्कतें आ रही हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस मुख्यालय ने दो विशेष टीमें सिर्फ आरोपी के 'डिजिटल फुटप्रिंट' और तकनीकी सुराग खंगालने के लिए तैनात की हैं।
आगरा-मथुरा रूट पर मिली आखिरी लोकेशन
जांच में जुटी टीमों को वरुण की अंतिम लोकेशन आगरा-मथुरा मार्ग पर मिली थी। इसके बाद पुलिस ने उसकी आगरा और पटियाला स्थित बहनों से भी कड़ी पूछताछ की है, ताकि उसके संभावित ठिकानों का पता लगाया जा सके। साथ ही प्रमुख रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंड्स के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं।
सीसीटीवी में फुटेज आई सामने, देर रात बैग लेकर भागा
घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में पुलिस को अहम सुराग मिले हैं। एक फुटेज में आरोपी रात करीब 2:40 बजे मकान से बाहर निकलता दिख रहा है। इसके बाद आगे लगे एक अन्य कैमरे में वह हाथ में बैकपैक और एक झोला लिए तेजी से भागता नजर आया।बिना वेरिफिकेशन के रखी गई थी एजेंसी की सेवाएं
शुरुआती जांच में सामने आया है कि दिवंगत पूर्व अधिकारी ने आरोपी केयरटेकर को 'वर्मा केयरटेकर एजेंसी' के जरिए रखा था। आरोपी मूल रूप से पंजाब के पटियाला का रहने वाला बताया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस एजेंसी के जरिए उसे रखा गया था, उसके पास न तो आरोपी का पुलिस वेरिफिकेशन था और न ही कोई अपडेटेड एड्रेस प्रूफ। पुलिस अब इस लापरवाही को लेकर एजेंसी की भूमिका की भी जांच कर रही है।

