छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में युवाओं और छात्रों को बेहतर क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) और अतिरिक्त कमाई का झांसा देकर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। शातिर गिरोह ने 40 से अधिक छात्रों को अपने जाल में फंसाकर उनके नाम पर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए और करीब 35 से 40 लाख रुपये की ठगी कर फरार हो गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपियों ऋषभ शर्मा, अनिरुद्ध सिंह और दीपक (दीपेश) जोशी के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इनमें से एक आरोपी दीपक जोशी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
शिकायत के बाद खुला ठगी का बड़ा नेटवर्क
कमीशन का लालच बन गया ठगी का जाल
गिरोह ने प्रत्येक फाइनेंस डील पर 2 से 3 हजार रुपये तक कमीशन देने का लालच भी दिया। छात्रों को लगा कि बिना निवेश के उन्हें अतिरिक्त आय होगी और साथ ही उनका क्रेडिट रिकॉर्ड भी बेहतर हो जाएगा।
इसी लालच में कई युवाओं ने अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य पहचान दस्तावेज आरोपियों को सौंप दिए। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विभिन्न फाइनेंस कंपनियों के माध्यम से छात्रों के नाम पर टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर (एसी) और अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फाइनेंस कराए।
सामान लेने के बाद उसे अपने कब्जे में रख लिया गया, जबकि ईएमआई की जिम्मेदारी छात्रों के नाम पर दर्ज रही।
शुरुआती किस्तें भरकर जीता भरोसा
हिमांशु देवांगन से अलग से भी हुई ठगी
पुलिस के अनुसार मुख्य शिकायतकर्ता हिमांशु देवांगन से आरोपियों ने करीब 92 हजार रुपये की अतिरिक्त ठगी भी की है। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी राशि की धोखाधड़ी की गई।
मामले में गिरफ्तार आरोपी दीपक (दीपेश) जोशी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। वहीं फरार आरोपी ऋषभ शर्मा और अनिरुद्ध सिंह की तलाश के लिए पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
