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दुर्ग में छात्रों से फाइनेंस ठगी मामला
दुर्ग में छात्रों से फाइनेंस ठगी मामला
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खुलासा : कमीशन और क्रेडिट स्कोर के लालच में फंसे छात्र, 40 लाख की ठगी

दुर्ग जिले में सिबिल स्कोर सुधारने और कमीशन कमाने का लालच देकर 40 से अधिक छात्रों से करीब 35 से 40 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने छात्रों के नाम पर टीवी, फ्रिज और एसी जैसे महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए और शुरुआती किस्तें भरकर भरोसा जीत लिया।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
12 Jun 2026, 12:42 PM
दुर्ग

 छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में युवाओं और छात्रों को बेहतर क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) और अतिरिक्त कमाई का झांसा देकर बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। शातिर गिरोह ने 40 से अधिक छात्रों को अपने जाल में फंसाकर उनके नाम पर महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए और करीब 35 से 40 लाख रुपये की ठगी कर फरार हो गया।

 मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपियों ऋषभ शर्मा, अनिरुद्ध सिंह और दीपक (दीपेश) जोशी के खिलाफ अपराध दर्ज किया है। इनमें से एक आरोपी दीपक जोशी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और उनकी तलाश के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

शिकायत के बाद खुला ठगी का बड़ा नेटवर्क

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मणिशंकर चंद्रा ने बताया कि पीड़ित छात्र हिमांशु देवांगन और उनके साथियों ने पद्मनाभपुर थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई थी। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपियों ने युवाओं को यह विश्वास दिलाया था कि उनके नाम पर ईएमआई (EMI) पर सामान खरीदने से उनका सिबिल स्कोर मजबूत होगा और भविष्य में उन्हें आसानी से लोन मिल सकेगा। आरोपियों ने छात्रों से कहा कि उन्हें किसी भी प्रकार की किस्त अपनी जेब से नहीं भरनी होगी। सभी मासिक किस्तों का भुगतान आरोपी स्वयं करेंगे। इस भरोसे के चलते बड़ी संख्या में छात्र उनके झांसे में आ गए और अपने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए।

कमीशन का लालच बन गया ठगी का जाल

गिरोह ने प्रत्येक फाइनेंस डील पर 2 से 3 हजार रुपये तक कमीशन देने का लालच भी दिया। छात्रों को लगा कि बिना निवेश के उन्हें अतिरिक्त आय होगी और साथ ही उनका क्रेडिट रिकॉर्ड भी बेहतर हो जाएगा। 

इसी लालच में कई युवाओं ने अपने आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य पहचान दस्तावेज आरोपियों को सौंप दिए। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विभिन्न फाइनेंस कंपनियों के माध्यम से छात्रों के नाम पर टीवी, फ्रिज, एयर कंडीशनर (एसी) और अन्य महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण फाइनेंस कराए।

सामान लेने के बाद उसे अपने कब्जे में रख लिया गया, जबकि ईएमआई की जिम्मेदारी छात्रों के नाम पर दर्ज रही।

शुरुआती किस्तें भरकर जीता भरोसा

ठगी को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने शुरुआत में कुछ महीनों तक नियमित किस्तें जमा कीं और छात्रों को तय कमीशन भी दिया। इससे पीड़ितों का भरोसा और बढ़ गया। लेकिन अप्रैल 2026 के बाद आरोपियों ने अचानक ईएमआई जमा करना बंद कर दिया और संपर्क से बाहर हो गए। जब फाइनेंस कंपनियों की किश्तें बकाया होने लगीं तो रिकवरी एजेंट सीधे छात्रों के घर पहुंचने लगे। तब पीड़ितों को एहसास हुआ कि उनके नाम पर लाखों रुपये का फाइनेंस चल रहा है और किस्तों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसके बाद एक-एक कर कई छात्र सामने आए और पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

हिमांशु देवांगन से अलग से भी हुई ठगी

पुलिस के अनुसार मुख्य शिकायतकर्ता हिमांशु देवांगन से आरोपियों ने करीब 92 हजार रुपये की अतिरिक्त ठगी भी की है। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कुल कितने लोगों को निशाना बनाया और कितनी राशि की धोखाधड़ी की गई।

 मामले में गिरफ्तार आरोपी दीपक (दीपेश) जोशी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के पूरे नेटवर्क से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। वहीं फरार आरोपी ऋषभ शर्मा और अनिरुद्ध सिंह की तलाश के लिए पुलिस टीम लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

युवाओं के लिए पुलिस की अपील

पुलिस ने युवाओं और छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर अपने दस्तावेज किसी को न सौंपें। सिबिल स्कोर सुधारने, आसान लोन दिलाने या कमीशन कमाने के नाम पर दिए जाने वाले ऐसे प्रस्तावों की पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें ताकि समय रहते धोखाधड़ी से बचा जा सके।
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