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हादसे का शिकार रामदहा झरना
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खुशियां बदलीं मातम में :  दोस्तों के सामने रामदहा वॉटरफॉल में समा गया युवक, बुझ गया घर का चिराग 

लापरवाही और डेंजर जोन: रामदहा वॉटरफॉल में अब तक 12 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके कारण प्रशासन ने इसे पहले ही 'डेंजर जोन' घोषित किया हुआ है। इसके बावजूद पर्यटक नियमों और चेतावनी बोर्डों को नजरअंदाज कर खतरनाक किनारों पर सेल्फी लेते हैं।

कीर्तिमान डेस्क
कीर्तिमान डेस्क
22 Jun 2026, 08:44 AM
भरतपुर

जिले के जनकपुर क्षेत्र में स्थित मशहूर रामदहा वॉटरफॉल एक बार फिर चीख-पुकार का गवाह बना। रविवार को यहाँ अपने दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने आया एक युवक जलप्रपात की गहराई में समा गया। हादसे के वक्त मौके पर भारी संख्या में लोग मौजूद थे, जिनके सामने ही यह दर्दनाक वाकया पेश आया। युवक को डूबता देख वहां अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार की आवाजें गूंजने लगीं। इस हादसे के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

कोटाडोल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस वॉटरफॉल में जान गंवाने वाले युवक की पहचान पतवाही गांव के निवासी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह छुट्टी के दिन अपने साथियों के साथ मौज-मस्ती करने और पिकनिक का लुत्फ उठाने यहां पहुंचा था। हादसे की खबर मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है और साथ आए दोस्तों से भी पूछताछ की जा रही है।

एक दर्जन से अधिक मौतें

रामदहा वॉटरफॉल का इतिहास हादसों से भरा रहा है। यह कोई पहली घटना नहीं है जब इस झरने ने किसी की जिंदगी छीनी हो। आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक यहां डूबने की वजह से एक दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। लगातार होते इन हादसों को देखते हुए ही स्थानीय प्रशासन ने काफी समय पहले इस पूरे क्षेत्र को 'डेंजर जोन' (खतरनाक इलाका) घोषित कर दिया था। जगह-जगह चेतावनी के बोर्ड भी लगाए गए हैं, लेकिन सैलानी इन नियमों को ताक पर रखकर अपनी जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे हैं।

जानलेवा सेल्फी का क्रेज: गहराई और फिसलन भरे किनारों पर लापरवाही भारी

स्थानीय ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो वॉटरफॉल पर आने वाले पर्यटकों में सेल्फी और तस्वीरें खिंचवाने की होड़ मची रहती है। लोग रोमांच के चक्कर में झरने के बिल्कुल मुहाने तक चले जाते हैं। काई जमी होने के कारण इन पथरीले किनारों पर भयंकर फिसलन होती है, और पैर डगमगाते ही सीधे गहरी खाई में गिरने का खतरा रहता है। नियमों को नजरअंदाज करना और पानी की गहराई को हल्के में लेना ही ऐसे बड़े हादसों की मुख्य वजह बन रहा है।

मानसून में उफान पर नदियां-झरने: जरा सी चूक और जिंदगी खत्म

बारिश का मौसम शुरू होते ही जलप्रपातों और नदियों का नजारा जितना खूबसूरत होता है, वह उतना ही जानलेवा भी हो जाता है। मानसून के दौरान अचानक पानी का जलस्तर और बहाव बढ़ जाता है। पानी मटमैला होने के कारण नीचे की गहराई या गड्ढों का अंदाजा लगाना नामुमकिन होता है। रामदहा जैसी जगहों पर इस सीजन में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है, जहां पानी का तेज करंट अच्छे-अच्छे तैराकों को भी संभलने का मौका नहीं देता।

सुरक्षा घेरा बढ़ाने की मांग 

इस ताजा घटना के बाद स्थानीय नागरिकों में भी प्रशासन के खिलाफ आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ चेतावनी बोर्ड लगा देने से बात नहीं बनेगी। उन्होंने मांग की है कि वॉटरफॉल के संवेदनशील और खतरनाक पॉइंट पर पक्का सुरक्षा घेरा (बैरिकेडिंग) बनाया जाए, वहां गार्ड्स की तैनाती हो और पर्यटकों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में और भी कई परिवार उजड़ सकते हैं।

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