कॉमनवेल्थ गेम्स : भारत का डबल गोल्ड, अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने रचा इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने जूडो में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। 23 वर्षीय अस्मिता डे ने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग और हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। दोनों खिलाड़ियों ने 36 साल बाद भारत को जूडो में स्वर्ण पदक दिलाकर देश का गौरव बढ़ाया।
कीर्तिमान डेस्क
01 Aug 2026, 12:39 PM
खेल डेस्क
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। इस बार जूडो में भारत ने नया इतिहास रच दिया है। 23 वर्षीय अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने अपनी-अपनी स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। खास बात यह रही कि दोनों खिलाड़ियों की जीत के बीच केवल 30 मिनट का अंतर था, जिससे भारतीय दल के लिए यह पल और भी यादगार बन गया।
महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अस्मिता डे ने कनाडा की हेडी क्वाच के खिलाफ शानदार मुकाबला खेला। कड़े संघर्ष के बाद गोल्डन स्कोर में उन्होंने जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स की जूडो प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। उनकी इस ऐतिहासिक जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दिलाई है।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का स्वर्णहर्ष सिंह ने भी रचा इतिहास
अस्मिता की जीत के करीब आधे घंटे बाद भारत को जूडो में एक और बड़ी सफलता मिली। पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में हर्ष सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी खिलाड़ी जोशुआ कैट्ज़ को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही हर्ष कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो का गोल्ड जीतने वाले भारत के पहले पुरुष खिलाड़ी बन गए। कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो को पहली बार 1990 में ऑकलैंड में पदक स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया था। पिछले 36 वर्षों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई बार पदक जरूर जीते, लेकिन स्वर्ण पदक का सपना अधूरा ही रहा। अब अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने यह लंबा इंतजार खत्म कर भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया है।
भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन
एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक जीतकर अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने न केवल भारत के पदकों की संख्या बढ़ाई, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि भारतीय जूडो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि को भारतीय खेल इतिहास की बड़ी सफलताओं में गिना जाएगा।