राजस्व प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण एक ऐसी व्यवस्था है, जिसके माध्यम से भूमि रिकॉर्ड, नामांतरण और रजिस्ट्री जैसे जरूरी काम अब ऑनलाइन और अधिक पारदर्शी तरीके से किए जा सकेंगे। इसके प्रमुख लाभों में ऑटो म्यूटेशन, मोबाइल ऐप से रिकॉर्ड डाउनलोड करने की सुविधा और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाएं शामिल हैं। आम जनता के लिए राजस्व विभाग से जुड़े काम लंबे समय से कठिन और समय लेने वाले माने जाते रहे हैं।
जमीन के नामांतरण, सीमांकन और अन्य प्रक्रियाओं के लिए लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इन परेशानियों को दूर करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सरल और जनहितैषी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। ये बदलाव डिजिटल युग की जरूरतों के अनुरूप राजस्व व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म को मिली कानूनी मान्यता
संशोधनों में सबसे बड़ा बदलाव राजस्व प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण को लेकर किया गया है। अब धारा 33 के तहत नोटिस और आधिकारिक सूचनाएं डिजिटल माध्यमों से भेजी जा सकेंगी, जिन्हें कानूनी मान्यता दी गई है। वहीं धारा 30 में संशोधन कर राजस्व न्यायालयों में अभिलेखों, प्रकरणों और फाइलों के डिजिटल आदान-प्रदान को अनिवार्य किया गया है। इससे मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।जिओ-रेफ्रेंस्ड नक्शों से आसान होगा सीमांकन
भूमि सीमांकन और नक्शों से जुड़े विवादों को कम करने के लिए धारा 107 के तहत जिओ-रेफ्रेंस्ड (Geo-Referenced) नक्शों को प्राथमिकता दी गई है। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति और सीमाओं की सटीक जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। डिजिटल नक्शों की मदद से भूमि विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी। जमीनों के अनावश्यक टुकड़ों में विभाजन और उससे जुड़ी समस्याओं को रोकने के लिए भी नियमों में बदलाव किया गया है। धारा 70 के संशोधन के अनुसार अब 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि के बंटवारे पर रोक लगा दी गई है। इसका उद्देश्य कृषि भूमि का आकार बनाए रखना और खेती को अधिक व्यावहारिक बनाना है।
भू-अर्जन प्रक्रिया में फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक
भू-अर्जन से जुड़ी धोखाधड़ी रोकने के लिए धारा 165, 172 और 178 में भी बदलाव किए गए हैं। अब भू-अर्जन की अधिसूचना या आशय पत्र जारी होते ही संबंधित भूमि के हस्तांतरण, व्यपवर्तन और खाता विभाजन पर रोक लग जाएगी। इससे जमीन से जुड़े अवैध लेन-देन पर नियंत्रण किया जा सकेगा। आम नागरिकों को सबसे बड़ी राहत नामांतरण प्रक्रिया में मिलेगी। धारा 110 में संशोधन के बाद अब 'ऑटो ई-म्यूटेशन' यानी स्वतः नामांतरण की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत रजिस्ट्री विभाग को ही नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने का अधिकार दिया गया है। इससे लोगों को अलग से नामांतरण के लिए आवेदन करने और कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।वारिसों के नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया होगी आसान
नए प्रावधानों के तहत राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कानूनी वारिसों के पक्ष में स्वतः ई-नामांतरण की सुविधा दी गई है। साथ ही भूमि मालिक अपने जीवनकाल में ही अपने कानूनी वारिसों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करा सकेंगे। इससे भविष्य में पारिवारिक विवादों और कोर्ट-कचहरी की परेशानियों को कम किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 में किए गए ये संशोधन केवल नियमों में बदलाव नहीं हैं, बल्कि एक आधुनिक और तकनीक आधारित राजस्व व्यवस्था की शुरुआत हैं। इससे आम जनता का समय, पैसा और मेहनत बचेगी तथा जमीन से जुड़े काम अधिक आसान, तेज और पारदर्शी तरीके से पूरे हो सकेंगे।