छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में प्रशासन ने सामाजिक न्याय को अमलीजामा पहनाते हुए एक बेहद सुदूर और संवेदनशील इलाके में दस्तक दी है। जिले के अंतिम छोर पर बसे ग्राम पंचायत पीडियाकोट में एक विशेष पेंशन भुगतान शिविर का आयोजन किया गया। यह आयोजन सिर्फ कागजी औपचारिकता या सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने जमीनी स्तर पर प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की है। इस शिविर के जरिए जहाँ एक तरफ बुजुर्गों और जरूरतमंदों को उनके हक की राशि आसानी से दिलाने का प्रयास किया गया, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों को सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूक भी किया गया।
जल्द कराएं ई-केवाईसी
शिविर के दौरान प्रशासनिक टीम ने ग्रामीणों को इस बात के लिए मानसिक रूप से तैयार किया कि वे अपनी नजदीकी बैंक शाखा में जाकर जल्द से जल्द अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) की प्रक्रिया को पूरा करवा लें। अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि एक बार यह तकनीकी काम पूरा हो जाने के बाद, भविष्य में उनकी पेंशन की राशि बिना किसी बिचौलिए या प्रशासनिक देरी के, सीधे और सुरक्षित तरीके से उनके खातों में जमा होने लगेगी। इससे ग्रामीणों का बैंकों और डिजिटल सिस्टम के प्रति डर भी कम हुआ।
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पेंशन शिविर में गूंजी नशामुक्ति की गूंज
पीडियाकोट का यह आयोजन सिर्फ एक वित्तीय या प्रशासनिक शिविर नहीं रहा, बल्कि इसे 'नशा मुक्त भारत अभियान' से जोड़कर एक बड़ा सामाजिक संदेश देने की कोशिश की गई। शिविर में आए युवाओं और बुजुर्गों को समझाया गया कि नशा किस तरह हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ देता है, आर्थिक रूप से कंगाल बनाता है और स्वास्थ्य को दीमक की तरह चाट जाता है। कार्यक्रम के आखिरी पड़ाव में माहौल काफी भावुक और ऊर्जा से भर गया, जब उपस्थित सभी पेंशनभोगियों, युवाओं, महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने एक सुर में हाथ उठाकर जिंदगी भर नशे से दूर रहने और अपने गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया।