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दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ धाम
दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ धाम
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बादलों से ऊपर महादेव : रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के साथ शुरू हुई तुंगनाथ यात्रा, आस्था, एडवेंचर और हिमालय का अद्भुत संगम

उत्तराखंड का तुंगनाथ धाम, जो दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है, वर्ष 2026 में रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। कपाट खुलने के शुरुआती 35 दिनों में ही करीब 47,000 भक्त दर्शन कर चुके हैं। चोपता से तुंगनाथ और चंद्रशिला तक का ट्रेक धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और एडवेंचर का अनूठा अनुभव प्रदान करता है।

कीर्तिमान न्यूज
31 May 2026, 01:01 PM
रुद्रप्रयाग

अगर आप इस चिलचिलाती गर्मी से दूर किसी ऐसी जगह जाने की सोच रहे हैं जहाँ आस्था, एडवेंचर और हिमालय की ठंडी हवाएं एक साथ मिलें, तो दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ धाम से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। वर्ष 2026 की यह यात्रा इस समय अपने पूरे शबाब पर है। कपाट खुलने के शुरुआती कुछ हफ्तों के भीतर ही यहाँ 47,000 से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जो कि अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।

क्या हैं 2026 यात्रा के ताजा अपडेट?

  • रिकॉर्ड तोड़ फुटफॉल: इस सीजन में केवल शुरुआती 35 दिनों के भीतर लगभग 47,000 भक्तों ने तुंगनाथ महाराज के दर्शन किए हैं। मिनी स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले 'चोपता' और तुंगनाथ घाटी में रौनक देखते ही बन रही है।

  • मौसम का मिजाज: जून के इस महीने में जहाँ मैदानी इलाके तप रहे हैं, वहीं तुंगनाथ और चंद्रशिला में मौसम बेहद सुहावना (10°C से 20°C) बना हुआ है। हालांकि, ऊंचे पहाड़ों पर मौसम अचानक बदल सकता है, इसलिए प्रशासन ने यात्रियों को स्थानीय मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही ट्रेक शुरू करने की सलाह दी है।

  • अनिवार्य बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन: उत्तराखंड सरकार ने इस साल सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए Yatra Registration Card अनिवार्य कर दिया है। आप 'Tourist Care Uttarakhand' ऐप या आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। सोनप्रयाग या रुद्रप्रयाग के आगे बिना वैध परमिट के जाना मुश्किल हो सकता है।

चोपता से तुंगनाथ और चंद्रशिला का सफर

तुंगनाथ की यात्रा केवल एक धार्मिक तीर्थयात्रा नहीं है, बल्कि यह हर ट्रैवलर और ट्रेकर के लिए एक लाइफ-चेंजिंग एक्सपीरियंस है।

ट्रेक की दूरी और कठिनाई स्तर

  • बेस कैंप: चोपता (Chopta)

  • ट्रेक की दूरी: चोपता से तुंगनाथ मंदिर तक लगभग 3.5 किलोमीटर (एक तरफ)।

  • समय: चढ़ाई चढ़ने में लगभग 2 से 3 घंटे का समय लगता है।

  • कठिनाई: मध्यम (रास्ता पूरी तरह से पत्थरों से पक्का बना हुआ है, इसलिए बिगिनर्स भी इसे आसानी से कर सकते हैं)।

💡 प्रो-टिप: तुंगनाथ मंदिर से केवल 1.5 किलोमीटर और ऊपर चंद्रशिला पीक (Chandrashila Peak) है। अगर आप सुबह जल्दी (करीब 4:30 AM) ट्रेक शुरू करते हैं, तो चंद्रशिला से दिखने वाला सूर्योदय (Sunrise) और नंदा देवी, त्रिशूल व चौखंबा चोटियों का 360-डिग्री नजारा आपकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल बन जाएगा।

आस्था और विज्ञान का अनोखा संगम: मंदिर का रहस्य

समुद्र तल से 3,680 मीटर (12,073 फीट) की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर 'पंच केदार' में तीसरा केदार है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसका निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया था। यहाँ शिव के 'बाहु' (भुजाओं) की पूजा होती है।

ताजा वैज्ञानिक अपडेट: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर का मुख्य ढांचा 5 से 6 डिग्री और परिसर के छोटे मंदिर लगभग 10 डिग्री तक झुक (Tilt) गए हैं। हालांकि, वैज्ञानिक और स्थानीय प्रशासन इसकी सुरक्षा और संरक्षण पर लगातार काम कर रहे हैं, और कपाट खुलने के बाद सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए सुचारू रूप से दर्शन कराए जा रहे हैं।

साथ ले जाना न भूलें

यदि आप इस हफ्ते या अगले महीने तुंगनाथ जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. गर्म कपड़े और रेनकोट: पहाड़ों का मौसम और बारिश अप्रत्याशित है। अपने साथ थर्मल, जैकेट और एक वाटरप्रूफ पोंचो (Poncho) जरूर रखें।

  2. कैश साथ रखें: रुद्रप्रयाग या उखीमठ के आगे मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने के कारण डिजिटल पेमेंट (UPI) या एटीएम काम नहीं करते। पर्याप्त नकदी साथ रखें।

  3. कपूर : ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है। सूंघने के लिए कपूर साथ रखना सांस लेने में मददगार साबित होता है।

  4. शॉर्टकट से बचें: ट्रेक के दौरान बने मुख्य रास्ते पर ही चलें, सीढ़ियों वाले शॉर्टकट से घुटनों पर दबाव पड़ता है और थकान दोगुनी हो जाती है।

कैसे पहुँचें चोपता/तुंगनाथ?

  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जौलीग्रांट (देहरादून) है।

  • रेल मार्ग: ऋषिकेश या हरिद्वार रेलवे स्टेशन तक ट्रेन से आएं, वहां से बस या शेयरिंग टैक्सी (वाया रुद्रप्रयाग-उखीमठ) से 7-8 घंटे में चोपता पहुंचा जा सकता है।

  • रोड ट्रिप: दिल्ली से चोपता की दूरी लगभग 450 किमी है, जिसे आप अपनी गाड़ी या कैब से तय कर सकते हैं।

निष्कर्ष: तो देर किस बात की? अपनी गाड़ियाँ स्टार्ट कीजिए, बैग पैक कीजिए, रजिस्ट्रेशन कराइए और निकल पड़िए बादलों को छूते हुए बाबा तुंगनाथ के इस पावन और एडवेंचरस सफर पर। हर हर महादेव!

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