Paper Bag Making Training: शांत्रीबाई कॉलेज मे विद्यार्थियों को कागज से लिफाफे एवं पेपर बैग बनाने का दिया गया प्रशिक्षण
Paper Bag Making Training: महासमुंद के शांत्रीबाई कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में IQAC के तत्वावधान में विद्यार्थियों को कागज से लिफाफे और पेपर बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। इस पहल का उद्देश्य कौशल विकास, रचनात्मकता, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
प्रकाशित: 14 Oct 2026, 07:44 PM· 2 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
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Paper Bag Making Training: स्थानीय शांत्रीबाई कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल विकास और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को पुराने और अनुपयोगी कागजों से आकर्षक लिफाफे व पेपर बैग बनाने की कला सिखाई गई।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक भूमिका दुबे, नरेंद्र टांडी, नेहा साहू और दामिनी साहू ने विद्यार्थियों को स्टेप-बाय-स्टेप मार्गदर्शन दिया। छात्रों ने कागज की सटीक कटाई, फोल्डिंग, पेस्टिंग और उसे एक मजबूत व उपयोगी बैग का रूप देने की पूरी प्रक्रिया को स्वयं करके सीखा। पूरी कार्यशाला के दौरान छात्र-छात्राओं में गजब का उत्साह देखने को मिला।
किताबी ज्ञान के साथ हुनर भी जरूरी: डॉ. सविता चंद्राकर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सविता चंद्राकर ने कहा कि आज के दौर में केवल डिग्री हासिल करना काफी नहीं है। विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा बेहद जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक का बढ़ता इस्तेमाल पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। ऐसे में कागज के थैले और लिफाफे बनाना न केवल एक रचनात्मक हुनर है, बल्कि पर्यावरण को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। अगर युवा इस तरह के छोटे-छोटे कौशल सीखते हैं, तो वे भविष्य में इसे स्वरोजगार और कुटीर उद्योग के रूप में भी अपना सकते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थी पर्यावरण चेतना और स्वरोजगार की ओर एक पहल
IQAC टीम के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य छात्रों में रीसाइक्लिंग (पुनर्चक्रण) की आदत डालना और उनमें नवाचार की सोच विकसित करना था। महाविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) को बढ़ावा देने के लिए ऐसी व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित की जाती रहेंगी।