Mobile Tower Protest: महासमुंद के अयोध्या नगर में वार्डवासियों ने रुकवाया टावर निर्माण
Mobile Tower Protest: महासमुंद अयोध्या नगर में Airtel मोबाइल टावर के विरोध में उतरे वार्डवासी, निजी लाभ बनाम नागरिक हित की पूरी कहानी पढ़ें keertiman.com पर।
प्रकाशित: 19 Sep 2026, 05:49 PM· 4 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
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Mobile Tower Protest: महासमुंद जिले के वार्ड नंबर 3 अयोध्या नगर में एक निजी भूमि पर Airtel कंपनी द्वारा प्रस्तावित मोबाइल टावर को लेकर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। यह Mobile Tower Protest दरअसल निजी आर्थिक लाभ और सामूहिक नागरिक हित के बीच टकराव का जीता जागता उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां वार्डवासियों ने संगठित होकर अपने स्वास्थ्य और सुरक्षा के अधिकार के लिए आवाज बुलंद की।
निजी जमीन पर टावर, वार्डवासियों की सहमति के बिना शुरू हुआ काम
अयोध्या नगर स्थित एक निजी भूमि पर भूस्वामी चंद्रशेखर सिंह ने Airtel कंपनी के साथ मोबाइल टावर लगाने के लिए अनुबंध कर लिया । खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में आसपास रहने वाले वार्डवासियों से किसी प्रकार की चर्चा या सहमति नहीं ली गई । भूस्वामी ने बिना किसी को सूचित किए कंपनी से अनुबंध कर सीधे निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। जब काम शुरू हुआ, तब जाकर स्थानीय निवासियों को इस बात की जानकारी मिली। यहीं से यह Mobile Tower Protest आकार लेना शुरू हुआ, क्योंकि निजी लाभ के लिए लिए गए इस फैसले में पूरे मोहल्ले के हित और स्वास्थ को दरकिनार कर दिया गया था।
वार्डवासियों का कहना है कि मोबाइल टावर लगने से क्षेत्र में रेडिएशन का खतरा बढ़ जाता है, साथ ही ऐसी संरचनाओं से भविष्य में दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। चूंकि अयोध्या नगर पूरी तरह रहवासी क्षेत्र है, जहां घनी आबादी में परिवार रहते हैं, इसलिए स्थानीय लोग किसी भी सूरत में यहां मोबाइल टावर नहीं चाहते। उनका मानना है कि एक व्यक्ति या कंपनी के व्यावसायिक फायदे के लिए पूरे मोहल्ले के स्वास्थ्य और सुरक्षा को जोखिम में नहीं डाला जा सकता।
मोबाईल टावर के लिए किए गए गड्ढे को समतल करती JCBग्रामीणों ने जेसीबी बुलाकर खुद रुकवाया काम
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब वार्डवासियों ने कुछ जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर संगठित तरीके से कार्रवाई करने का फैसला किया। उन्होंने जेसीबी मशीन बुलवाकर टावर के लिए खोदे गए गड्ढे को तत्काल बंद करवा दिया और जमीन को समतल कर दिया। वार्डवासियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि दोबारा टावर निर्माण का कार्य शुरू किया गया, तो वे बड़े से बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि चाहे जो भी परिस्थिति बने, अयोध्या नगर जैसे घनी आबादी वाले रहवासी इलाके में मोबाइल टावर लगने नहीं दिया जाएगा।
भू स्वामी का पक्ष — अनुबंध हो चुका, बिना स्टे रुकना मुश्किल
इस मामले में जब वार्डवासियों ने भूस्वामी चंद्रशेखर सिंह से सीधे बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही Airtel कंपनी के साथ 20 वर्षों के लिए विधिवत अनुबंध कर लिया है और अब बिना किसी स्टे ऑर्डर के कंपनी इस कार्य को रोक नहीं सकती। हालांकि, वार्डवासियों के लगातार और मजबूत विरोध को देखते हुए भूस्वामी का रुख अब कुछ नरम पड़ता दिख रहा है और वे स्वयं भी टावर निर्माण कार्य को रोकने के पक्ष में आ गए हैं। इस संबंध मे उन्होंने कलेक्टर को लिखित आवेदन भी दिया है, लेकिन वहाँ से कोई जवाब या स्टे ऑर्डर नहीं मिल पाया है।
निजी लाभ बनाम नागरिक हित — कौन भारी?
इस पूरे प्रकरण को गहराई से देखें तो यह स्पष्ट होता है कि यह मामला सिर्फ एक मोबाइल टावर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बड़े सवाल को जन्म देता है कि क्या एक व्यक्ति की निजी संपत्ति पर आर्थिक लाभ के लिए लिया गया फैसला, जब वह पूरे मोहल्ले के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्रभावित करता हो, तो उसे बिना सामूहिक सहमति के लागू किया जाना चाहिए? भूस्वामी और कंपनी के बीच हुआ अनुबंध कानूनी रूप से भले ही वैध हो, लेकिन जिस तरह स्थानीय लोगों की अनदेखी करते हुए यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई, वह प्रशासनिक पारदर्शिता और जन-भागीदारी के मूल सिद्धांतों पर सवाल खड़े करती है।
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