छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के कोमाखान थाना क्षेत्र में हुए एक अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। जिसे शुरुआत में एक आम सड़क हादसा समझा जा रहा था, वह असल में बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई हत्या की वारदात निकली।
पुरानी रंजिश और बदले की आग में झुलस रहे आरोपियों ने न सिर्फ एक युवक पर जानलेवा हमला किया, बल्कि कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए उसे दुर्घटना का रूप देने की खौफनाक साजिश भी रची थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या की धारा जोड़ते हुए दो मुख्य आरोपियों को धरदबोचा है, जबकि एक अन्य साथी अब भी फरार है।
37 दिनों तक जिंदगी की जंग हार गया चितरंजन
घटनाक्रम की शुरुआत 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। आरोपियों के जानलेवा हमले के बाद से ही पीड़ित युवक चितरंजन पटेल जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा था। वह अस्पताल में बेहोशी की हालत में वेंटिलेटर पर था। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, हमले के ठीक 37 दिनों बाद यानी 22 मई 2026 को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
युवक की मौत के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले परिस्थितिजन्य साक्ष्यों (Circumstantial Evidence) के आधार पर कोमाखान पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) को जोड़कर अपनी तफ्तीश तेज की, जिसके बाद इस पूरे हत्याकांड का भंडाफोड़ हुआ।
कब्रिस्तान के पास ले जाकर डंडों से पीटा
पुलिस की सख्त पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने जो खुलासा किया, वह चौंकाने वाला था। आरोपियों ने बताया कि चितरंजन पटेल पूर्व में उनके परिवार की (एक आरोपी की) बहन को भगाकर ले गया था। इसी बात को लेकर वे समाज में बदनामी महसूस कर रहे थे और उनके मन में बदले की भावना सुलग रही थी।
साजिश की शुरुआत: बदला लेने की नीयत से आरोपियों ने अपने साथियों के साथ मिलकर 15 अप्रैल 2026 को चितरंजन को ठिकाने लगाने का फुलप्रूफ प्लान बनाया।
कब्रिस्तान के पास हमला: योजना के मुताबिक, आरोपियों ने लामीसरार मुर्गी फार्म मोड़ के पास चितरंजन का रास्ता रोका। वे उसे जबरन पास के ही एक सुनसान कब्रिस्तान के पास ले गए और वहां डंडों व लाठियों से उस पर तब तक बर्बरतापूर्वक हमला किया, जब तक कि वह लहूलुहान होकर बेहोश नहीं हो गया।
हादसे का रूप देने का प्रयास: जब चितरंजन मरणासन्न स्थिति में पहुंच गया, तो आरोपियों ने शातिर दिमाग चलाया। उन्होंने वारदात को सड़क हादसे का रूप देने के लिए चितरंजन की मोटरसाइकिल को पत्थरों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके बाद लहूलुहान युवक और उसकी बाइक को सड़क किनारे एक बिजली के खंभे के पास फेंक दिया, ताकि देखने वालों और पुलिस को लगे कि बाइक खंभे से टकराई है।
मां की शिकायत से खुला राज
इस पूरी साजिश का सुराग तब मिला जब मृतक की मां लीलाबाई पटेल ने 3 मई 2026 को कोमाखान थाने में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया था कि ग्राम लामीसरार स्थित मुर्गी फार्म के पास दीपेश साहू, कुंजन साहू और एक अन्य व्यक्ति ने उनके बेटे चितरंजन के साथ मारपीट की थी।
मां की इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने शुरुआती तौर पर बीएनएस (BNS) की धारा 296, 115(2), 351(2), 126(2), 324(4) और 3(5) के तहत केस दर्ज किया था, जो चितरंजन की मौत के बाद कत्ल के मुकदमे में तब्दील हो गया।
दो सगे आरोपी सलाखों के पीछे
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य हत्याकांड के दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है:
कुंजन साहू (उम्र 25 वर्ष) – निवासी ग्राम बकमा
दीपेश साहू (उम्र 24 वर्ष) – निवासी ग्राम बकमा
"दोनों आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उन्हें स्थानीय अदालत में पेश कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले का तीसरा आरोपी फिलहाल फरार है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जल्द ही उसे भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
