अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा संघर्ष ने आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कई महीनों में इस संघर्ष के चलते अफगानिस्तान में करीब 500 नागरिकों की मौत हुई है, जबकि 1,200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। रिपोर्ट में हवाई हमलों, नागरिकों को हुए नुकसान और अफगान महिलाओं की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
UN रिपोर्ट में 499 नागरिकों की मौत का दावा
संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन अफगानिस्तान (UNAMA) ने मानवाधिकार स्थिति पर जारी रिपोर्ट में बताया कि अक्टूबर से जून के अंत तक पाकिस्तान-अफगानिस्तान संघर्ष में अफगान क्षेत्र में 499 नागरिकों की मौत हुई और 1,216 लोग घायल हुए। रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद सीमा पर हिंसा जारी है। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें आम लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
बचाव कार्य कर रहे लोगों पर भी हुआ हमला
UNAMA की रिपोर्ट में पूर्वी अफगानिस्तान के पक्तिया प्रांत की एक घटना का जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 28 जून को एक रिहायशी इमारत पर लगातार दो हवाई हमले हुए, जिसमें 22 लोगों की मौत हुई। मृतकों में पांच बच्चे भी शामिल थे। इस हमले में करीब 185 लोग घायल हुए। रिपोर्ट के अनुसार, ज्यादातर मौतें दूसरे हमले में हुईं, जब स्थानीय लोग पहले हमले में घायल लोगों को बचाने के लिए मौके पर पहुंचे थे। UNAMA की मानवाधिकार निदेशक फियोना फ्रेजर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत बचाव कार्य में लगे लोगों, चिकित्सा कर्मियों और सहायता कर्मचारियों को विशेष सुरक्षा दी जाती है। ऐसे लोगों को निशाना बनाना प्रतिबंधित है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर लगाए गंभीर आरोप
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ऐसे आतंकी संगठनों को पनाह दे रही है, जो पाकिस्तान में हमलों को अंजाम देते हैं। इनमें तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। इस्लामाबाद का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन संगठनों के हमलों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है। हालांकि, अफगानिस्तान ने इन आरोपों को खारिज किया है। तनाव उस समय और बढ़ गया जब फरवरी में अफगान बलों ने पाकिस्तान की ओर से किए गए हवाई हमलों के जवाब में कार्रवाई की। इसके बाद पाकिस्तान ने इसे गंभीर सैन्य टकराव बताया था।
काबुल में नशा मुक्ति केंद्र पर हमला सबसे घातक
रिपोर्ट के मुताबिक, इस संघर्ष के दौरान मार्च में काबुल में हुआ हमला सबसे घातक घटनाओं में शामिल रहा। पाकिस्तानी हवाई हमले में एक नशा मुक्ति केंद्र को निशाना बनाया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत हुई। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इस हमले की जांच संभावित युद्ध अपराध के तौर पर करने की मांग की थी। हालांकि पाकिस्तान ने नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने UNAMA को दिए जवाब में कहा कि उसके सैन्य अभियान केवल आतंकी ठिकानों और उनसे जुड़े ढांचों को निशाना बनाकर किए गए थे। UNAMA ने साफ किया है कि उसके पास केवल अफगानिस्तान में हुई घटनाओं की निगरानी का अधिकार है। पाकिस्तान की सीमा के अंदर संघर्ष के कारण हुई नागरिक मौतों का कुल आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
अफगान महिलाओं पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में बताया गया कि तालिबान सरकार ने महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक जीवन को लेकर कई प्रतिबंध लगाए हैं। इनमें माध्यमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई पर रोक, सख्त पहनावे के नियम, कई क्षेत्रों में काम करने पर प्रतिबंध और घर से बाहर निकलने पर पुरुष रिश्तेदार की मौजूदगी जैसी पाबंदियां शामिल हैं। रिपोर्ट में हेरात शहर की घटना का भी जिक्र किया गया है, जहां जून में पहनावे के नियमों के उल्लंघन के आरोप में कम से कम 30 महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। हिरासत के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत हुई और कई लोग घायल हुए।
संघर्ष का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर
UN की रिपोर्ट एक बार फिर बताती है कि सीमा विवाद और सैन्य तनाव का सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, लेकिन जमीन पर रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा और मानवीय सहायता सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।