November 1 New Rules: आम लोगों और कारोबारियों की रोजमर्रा की वित्तीय गतिविधियों से जुड़े कई नियमों में बदलाव होने जा रहे हैं। इसके अलावा LPG सिलेंडर की कीमतों और पेंशनधारकों के जीवन प्रमाण पत्र से जुड़े अपडेट पर भी लोगों की नजर रहेगी। इन बदलावों का असर कारोबारियों से लेकर निवेशकों और आम मोबाइल उपभोक्ताओं तक पड़ सकता है।
वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था को अधिक सरल बनाने के लिए GST काउंसिल ने रिटर्न फाइलिंग और रिफंड प्रक्रिया में सुधार की सिफारिश की है। इन बदलावों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए टैक्स अनुपालन को आसान बनाना और रिफंड मिलने की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम करना है।
GSTR-1 और GSTR-1A के नए ड्राफ्ट फॉर्म पर मांगी जाएगी राय
वित्त मंत्रालय 1 नवंबर को myGov पोर्टल पर GSTR-1, GSTR-1A और इनवॉइस फर्निशिंग फैसिलिटी (IFF) से जुड़े संशोधित फॉर्म के ड्राफ्ट सार्वजनिक कर सकता है। इन पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाएंगे। प्रस्तावित बदलावों का मकसद GST रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को ज्यादा सुविधाजनक बनाना है। इन नए फॉर्म को 1 अप्रैल 2027 से लागू करने की योजना है। इसके अलावा, पात्र GST रिफंड के लिए ऑटोमेटेड अप्रूवल की व्यवस्था शुरू होने की भी उम्मीद है।
अब कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर दिखेगा कॉल करने वाले का नाम
दूरसंचार विभाग (DoT) ने टेलीकॉम कंपनियों को कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सेवा लागू करने का निर्देश दिया है। इस सुविधा के तहत इनकमिंग कॉल आने पर मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम और नंबर दिखाई देगा। इससे अनजान नंबरों से आने वाली कॉल की पहचान करने में आसानी होगी। इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य फर्जी कॉल और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के साथ मोबाइल उपभोक्ताओं की सुरक्षा को बेहतर बनाना है।म्यूचुअल फंड निवेश में Direct Plan बनेगा डिफॉल्ट विकल्प
1 नवंबर से एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर Direct Mutual Fund Plan को डिफॉल्ट विकल्प बनाने की तैयारी है। इसका मतलब है कि निवेश के दौरान Direct Plan पहले से चयनित दिखाई देगा। अगर कोई निवेशक इसके बजाय Regular Plan चुनता है, तो उसे पहले इस प्लान के अधिक एक्सपेंस रेशियो यानी निवेश से जुड़ी लागत की जानकारी दी जाएगी।
निवेश और वित्तीय नियमों को आसान बनाने पर SEBI का जोर
SEBI लगातार निवेश से जुड़े नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसी कड़ी में लिस्टिंग और डिस्क्लोजर से संबंधित प्रावधानों की समीक्षा भी की जा रही है। नियामक का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरी जानकारी आसानी से मिले और वित्तीय बाजार में पारदर्शिता बनी रहे।







