Consumer Case: अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनी PepsiCo को जानते होंगे, इसकी एक गलती की वजह से उसे हजारों रुपए का फटका लगा है। कंपनी के पोटैटो चिप्स के प्रोडक्ट लेज के 5 रुपए के पैकेट में तय वजन से काफी कम चिप्स भरा हुआ था। कंपनी की इस गलती को एक जागरूक ग्राहक ने पकड़ लिया। उसने कंपनी को कंज्यूमर कोर्ट में घसीट लिया। कोर्ट ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को पैकेट की कीमत लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही ग्राहक को 8,000 रुपए हर्जाने और मुकदमे के खर्च के लिए भी दिलवाया।
क्या है पूरा मामला
मामला 5 रुपए के Lay’s चिप्स के पैकेट से जुड़ा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जयपुर निवासी चंदरमन जालान ने 10 नवंबर 2020 को Metro Cash & Carry India Private Limited के आउटलेट से घरेलू सामान खरीदा था। इसी खरीदारी में उन्होंने PepsiCo के Lay’s ब्रांड का 5 रुपए वाला चिप्स पैकेट भी लिया था। पैकेट पर चिप्स का वजन 15 ग्राम दर्ज था।
पैकेट का वजन किया तो सामने आई गड़बड़ी
जालान जब घर पर मेहमानों को चिप्स परोसने लगे, तो पैकेट सामान्य से काफी हल्का महसूस हुआ। इसके बाद उन्होंने संदेह होने पर पैकेट में मौजूद चिप्स को मशीन पर तौला। जांच में चिप्स का वास्तविक वजन केवल 4 ग्राम निकला, जबकि पैकेट पर 15 ग्राम लिखा हुआ था। इस तरह घोषित वजन और वास्तविक मात्रा में 11 ग्राम का अंतर सामने आया।उपभोक्ता आयोग में दर्ज कराई शिकायत
पैकेट में कम वजन मिलने के बाद चंदरमन जालान ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने इस संबंध में जानकारी जुटाई और 6 अप्रैल 2022 को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-II, जयपुर में शिकायत दर्ज कराई। अपनी याचिका में उन्होंने कंपनी पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पैकेट पर जितना वजन दर्शाया गया है, ग्राहक को उतनी मात्रा में उत्पाद मिलना चाहिए।
PepsiCo को 8,000 रुपए मुआवजा देने का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने PepsiCo को ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कई तरह के भुगतान करने का निर्देश दिया। कंपनी को 5 रुपए की खरीद राशि वापस करने और 6 अप्रैल 2022 से भुगतान की तारीख तक इस रकम पर 6 प्रतिशत सालाना ब्याज देने को कहा गया है।
फैसले के लिए तय की गई भुगतान की समयसीमा
आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि फैसले के एक महीने के भीतर निर्धारित राशि का भुगतान किया जाए। तय समय में भुगतान नहीं करने पर बकाया राशि पर भी आदेश के अनुसार ब्याज देना होगा। महज 5 रुपए के चिप्स पैकेट से शुरू हुआ यह मामला उपभोक्ता अधिकारों और पैकेज्ड उत्पादों पर दर्ज वजन की सही मात्रा सुनिश्चित करने के महत्व को सामने लाता है।







